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जब अटल जी मेरी कविता सुनकर बोले — अरे! राम प्रकाश मंच पर तो समां बांध देते हो

Date : 24-Dec-2025

लखनऊ, 24 दिसंबर  भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती (25 दिसंबर) लखनऊ के चर्चित साहित्यकार - कवि राम प्रकाश​ त्रिपाठी 'प्रकाश' के लिए बहुत ही खास होता है, क्योंकि ये दो कवियों की जुगलबंदी को याद कराता है। कवि राम प्रकाश​ त्रिपाठी 'प्रकाश' के जीवन की बड़ी उपलब्धि ये है कि वे भारत रत्न अटल जी की मौजूदगी में न केवल कविता पाठ कर चुके हैं बल्कि उनसे शाबासी और सम्मान भी पा चुके हैं। अटल जी कहते थे —'अरे राम प्रकाश जी आप तो अपनी कविता से समां बांध देते हो'।

'हिंदुस्थान समाचार ' ने अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस के खास मौके पर अटल जी से जुडे कुछ रोचक प्रसंगों पर राम प्रकाश​ त्रिपाठी 'प्रकाश' जी से खास बातचीत की।

84 वर्षीय वयोवृद्ध कवि-साहित्यकार राम प्रकाश त्रिपाठी 'प्रकाश' केंद्रीय विद्यालय एएमसी लखनऊ से उप प्रधानाचार्य पद से 2003 में सेवानिवृत हुए थे। वे हाल ही में 20 दिसंबर, 2025 को ही डाॅ. रामदरश मिश्र स्मृति सम्मान से सम्मानित किए गए हैं।

लखनऊ से सांसद रहे अटल बिहारी वाजपेयी से जुडे प्रसंगों की चर्चा करते हुए​ त्रिपाठी ने बताया 'अटल जी के साथ बहुत ही दोस्ताना संबंध थे। लखनऊ के साहित्यिक आयोजनों में अटल जी के साथ मेरी उपस्थिति अनिवार्य सी होती थी।' उन्होंने आगे कहा 'अटल जी भाजपा के तत्कालीन लखनऊ महानगर अध्यक्ष भगवती प्रसाद शुक्ला से कह कर मुझे कार्यक्रम में बुलाते और मेरी कविताएं सुनते।'

राम प्रकाश त्रिपाठी 'प्रकाश' एक कार्यक्रम को याद करते हुए बताते हैं कि 'एक बार अटल जी ने लखनऊ के गणेशगंज स्थित तुलसी पार्क में एक बडे़ सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों के चार प्रमुख लोगों को सम्मानित किया था, उनमें साहित्य के क्षेत्र से हमारा राम प्रकाश त्रिपाठी 'प्रकाश' का भी नाम था। इस समारोह में अटल जी ने मेरी कई कविताएं भी सुनी'।

वयोवृद्ध कवि - साहित्यकार एक अन्य कार्यक्रम का जिक्र करते हुए बताया कि लखनऊ के लालबाग में अटल जी के मुख्य आ​ति​थ्य में एक बार होली मिलन समारोह आयोजित किया गया। इसमें भाजपा विधायक, सांसद और प्रमुख पदाधिकारियों को ही प्रवेश दिया गया था। इसमें अटल जी ने राम प्रकाश त्रिपाठी 'प्रकाश' को एकल काव्य पाठ के लिए बुलाया था। उस समारोह को याद करते हुए 'प्रकाश'बताते हैं कि कविताएं सुनकर अटल जी बोले 'अरे राम प्रकाश जी आप तो समां बांध देते हो'। उनके इतना कहते ही पूरा कार्यक्रम स्थल तालियां से गुंजायमान हो गया था।

त्रिपाठी बताते हैं कि कार्यक्रम खत्म होने के बाद जब लोग निकलने लगे तो वर्तमान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कंधे पर हाथ रख कर बोले माननीय अटल जी आपकी कविताएं बहुत पसंद करते हैं। अटल जी 1991 के अलावा 1996, 1998, 1999 और 2004 में लखनऊ से लोकसभा के लिए चुने गए थे।


साहित्य की हर विधा में लिखते हैं 'प्रकाश'

मूल रूप से उन्नाव के निवासी 84 वर्षीय वयोवृद्ध राम प्रकाश त्रिपाठी 'प्रकाश' एक चर्चित साहित्यकार, लेखक और कवि हैं। साहित्य की सभी विधाओं में अब तक दो दर्जन से अधिक रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में वे लखनऊ में निवास करते हुए साहित्य साधना में जुटे हुए हैं।



'प्रकाश' द्वारा भारत रत्न अटल जी पर लिखी कविता के प्रमुख अंश -

भारत रत्न स्मृति शेष माननीय अटल - अवदान

श्री अटल तो अटल जिनको जग जानता,

जिनका लोहा भी सारा है जग मानता।

लोकप्रियता का जनज्वार इतना प्रबल,

स्वप्न में पूर्वजों को नहीं ध्यान था।।

श्री अटल लोक शुचिता की संकाय हैं,

भारतीय अस्मिता के अभिप्राय हैं।

देश नक्शे कदम साथ मिलकर चला,

श्री अटल भाजपा की अक्षत दाय हैं।।

श्री अटल की नकल है नहीं लोक में,

ये थे जग के सगे हर्ष और शोक में।

कोटि कंठों से यशगान ​जिनका विमल,

करते पुरुखे सुयश गान परलोक में।।

राज - नीति के अटल की शख्सियत से क्या कहने हैं,

श्री अटल ह्रदय के उच्च धरातल पर ही रहने हैं।

पक्ष संग प्रतिपक्ष दष्टि में नहीं उलहने हैं,

ये अजात हैं शत्रु सभी आंखों के गहने हैं।।



इनकी स्मृति को उर में बसा दीजिए,

इनको आस्था का नंदन कहा कीजिए।

थे जितने तन के ​विमल उतने मनके कमल,

इनको माथे का चंदन बना लीजिए।।

पोखरख परीक्षण पर ये पंक्तियां सुनिए -

जो हुआ पोखरण में वो होना ही था,

राष्ट माथे की कालिख तो धोना ही था।

कुछ थे तन के सुघर पर थे मन के मलिन,

क्लिंटन सरीखों को रोना धोना ही था।।


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