शिमला, 13 जनवरी हिमाचल प्रदेश के लोकनिर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट चर्चा का केंद्र बन गई है। इसमें उन्होंने हिमाचल प्रदेश में तैनात कुछ बाहर के राज्यों के आला आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। विक्रमादित्य सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वे उपमुख्यमंत्री के उस अभिभाषण से सहमत हैं, जिसमें अधिकारियों के रवैये पर चिंता जताई गई थी।
उन्होंने कहा कि कुछ यूपी-बिहार के आला अधिकारी हिमाचल में हिमाचलियत की धज्जियां उड़ा रहे हैं और उन्हें प्रदेश से ज्यादा सरोकार नहीं है। उनके मुताबिक समय रहते ऐसे अधिकारियों से निपटना जरूरी है, नहीं तो हिमाचल के हित ही निपट जाएंगे।
विक्रमादित्य सिंह ने पोस्ट में यह भी साफ किया कि बाहर के राज्यों से आए अधिकारियों का वे पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन उन्हें हिमाचली अधिकारियों से सीख लेने की जरूरत है। उन्होंने दो टूक कहा कि हिमाचल के हितों के साथ कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जब तक अधिकारी हिमाचल में हैं। उन्हें यहां के लोगों की सेवा करनी चाहिए, ‘शासक’ बनने की गलती नहीं करनी चाहिए।
इस पोस्ट के सामने आते ही सियासी गलियारों और अफसरशाही में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे हिमाचल के हितों की खुली पैरवी बता रहे हैं, तो वहीं कुछ इसे क्षेत्रवाद की भावना को बढ़ावा देने वाला कदम मान रहे हैं। कई टिप्पणियों में सवाल उठाया जा रहा है कि क्या इस तरह के बयान प्रशासनिक व्यवस्था पर दबाव बनाने की कोशिश हैं।
वहीं, समर्थकों का कहना है कि स्थानीय परिस्थितियों और संवेदनाओं को समझे बिना काम करने वाले अधिकारियों पर सवाल उठाना गलत नहीं है।
विक्रमादित्य सिंह की यह पोस्ट ऐसे समय आई है, जब पिछले महीने मंडी में आयोजित जनसंकल्प सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी अफसरों को लेकर सख्त बयान दिया था। हिमाचल प्रदेश सरकार के तीन साल पूरे होने पर पड्डल मैदान में हुए इस सम्मेलन में मुकेश अग्निहोत्री ने कहा था कि कुछ अधिकारी रात के अंधेरे में भाजपा नेताओं के घर हाजिरी भर रहे हैं और साजिशें रच रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से आग्रह किया था कि ऐसे अधिकारियों से सख्ती से निपटा जाए। डिप्टी सीएम ने मंच से यह भी कहा था कि वे किसी से डरने वाले नहीं हैं।
बता दें कि विक्रमादित्य सिंह वर्तमान में सुक्खू सरकार में लोकनिर्माण मंत्री हैं और शिमला ग्रामीण से लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं। वे हिमाचल के छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के पुत्र हैं। उनकी मां प्रतिभा सिंह पूर्व सांसद और प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं। हिमाचल की राजनीति में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और वीरभद्र सिंह के बीच लंबे समय तक ‘छत्तीस का आंकड़ा’ रहा है। 2012 से 2017 तक वीरभद्र सिंह के मुख्यमंत्री रहते सुक्खू प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे। संयोग से 2022 में जब सुक्खू पहली बार मुख्यमंत्री बने, तब प्रतिभा सिंह प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। पिछले नवंबर में उनकी जगह विनय कुमार को कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।
