‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल के खुलासे के बाद कश्मीर में मस्जिदों और मदरसों की प्रोफाइलिंग शुरू | The Voice TV

Quote :

"जिन्दगी के लक्ष्य में प्राप्ती करते समय सिर्फ 2 सोच रखनी चाहिए, अगर रास्ता मिल गया तो ठीक, नहीं तो रास्ता में खुद बना लूँगा।"

National

‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल के खुलासे के बाद कश्मीर में मस्जिदों और मदरसों की प्रोफाइलिंग शुरू

Date : 13-Jan-2026

 श्रीनगर, 13 जनवरी। पिछले वर्ष ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कश्मीर घाटी में मस्जिदों, मदरसों तथा इन धार्मिक संस्थानों से जुड़े प्रबंधनकर्ताओं, इमामों और शिक्षकों की प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि मस्जिदों, मदरसों, इमामों (नमाज के अगुआ), शिक्षकों और इन संस्थानों की प्रबंधन समितियों से जुड़े व्यक्तियों का विवरण एकत्र करने के लिए गांव स्तर के नंबरदारों (राजस्व विभाग के कर्मचारी) को एक निर्धारित प्रोफार्मा उपलब्ध कराया गया है। इस प्रक्रिया के तहत धार्मिक संस्थानों की वित्तीय स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें निर्माण कार्यों के लिए प्रयुक्त धन के स्रोतों और दैनिक खर्चों से जुड़ी जानकारी शामिल है।

अधिकारियों के अनुसार, सामान्य विवरण के अलावा मदरसों के शिक्षकों और इमामों से आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, संपत्ति स्वामित्व, सोशल मीडिया हैंडल, पासपोर्ट, एटीएम कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, सिम कार्ड, मोबाइल फोन मॉडल और आईएमईआई नंबर जैसी विस्तृत जानकारियां भी मांगी गई हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य मस्जिदों, मदरसों और उनसे जुड़े व्यक्तियों का एक समग्र और अद्यतन डेटाबेस तैयार करना है।

उल्लेखनीय है कि नवंबर 2025 में ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के दौरान जांच में यह सामने आया था कि कुछ संदिग्धों को मदरसों या सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी बनाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, मौलवी इरफान सहित कुछ इमामों की संदिग्ध भूमिका के चलते वे जांच के दायरे में आए थे। प्रोफार्मा में मस्जिद या मदरसे से जुड़े धार्मिक संप्रदाय—बरेलवी, देवबंदी, हनफ़ी अथवा अहले हदीथ—का विवरण भी मांगा गया है।

अधिकारियों ने बताया कि घाटी में लंबे समय से प्रचलित सूफी परंपरा के विपरीत शुद्धतावादी इस्लामी विचारधारा के बढ़ते प्रभाव को युवाओं के कट्टरपंथीकरण का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसी क्रम में इमामों, शिक्षकों और प्रबंधन समिति के सदस्यों से किसी भी आतंकवादी या विध्वंसक गतिविधि में पूर्व संलिप्तता, लंबित मामलों अथवा न्यायालय द्वारा दी गई सजा से संबंधित विवरण भी मांगा गया है।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस के सहयोग से नवंबर 2025 के पहले सप्ताह में जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े एक अंतरराज्यीय ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। इस कार्रवाई में तीन डॉक्टरों सहित नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था और लगभग 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी।

बरामद विस्फोटकों में अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल थे, जिनमें से करीब 360 किलोग्राम अत्यधिक ज्वलनशील अमोनियम नाइट्रेट होने का संदेह जताया गया था। इसके अलावा फरीदाबाद के एक किराए के मकान से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया था कि 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के बाहर विस्फोट के प्रयास में इस्तेमाल की गई कार एक कश्मीरी डॉक्टर उमर नबी द्वारा चलाई जा रही थी।

पुलिस के अनुसार, फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय के शिक्षक गनाई को श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद समर्थक पोस्टर लगाने के मामले में वांछित घोषित किए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था। 19 अक्टूबर को श्रीनगर के बुनपोरा-नौगाम इलाके में विभिन्न स्थानों पर ऐसे पोस्टर लगाए गए थे, जिनमें पुलिस और सुरक्षा बलों को धमकियां दी गई थीं। इसी जांच से पूरे अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि जांच में एक ऐसे ‘सफेदपोश’ आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र का पता चला है, जिसमें कट्टरपंथी पेशेवर और छात्र शामिल हैं, जो पाकिस्तान और अन्य देशों में बैठे आतंकवादी आकाओं के संपर्क में थे।


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload
Advertisement









Advertisement