बेंगलुरु, 22 जनवरी । मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को पुनः लागू किए जाने तक राज्य सरकार और कांग्रेस पार्टी का संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सदन के सत्र को संबोधित न करके राज्यपाल ने संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया यहां विधानसाैध में पत्रकाराें से वार्ता कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को पुनः लागू किए जाने तक राज्य सरकार और कांग्रेस का संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के मनरेगा को समाप्त कर ‘विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘वीबीजी राम जी’ नाम से नया कानून लागू करने पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले इस कानून से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाया गया है।
उन्हाेंने कहा कि 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा, सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और रोजगार का अधिकार जैसे ऐतिहासिक कानून लागू किए गए थे। मनरेगा का उद्देश्य गरीब श्रमिकों को न्यूनतम 100 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करना था, जिससे दलितों, महिलाओं, छोटे किसानों और ग्रामीण श्रमिकों को बड़ा लाभ हुआ।
नए कानून में रोजगार की गारंटी नहींसिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि नए कानून में 53 प्रतिशत महिलाएं और 28 प्रतिशत दलित शामिल होने के बावजूद उन्हें रोजगार की कोई गारंटी नहीं दी गई है। पहले कानून के तहत श्रमिक अपनी पसंद के स्थान पर और छोटे किसान अपनी ही जमीन पर काम कर सकते थे। अब केंद्र सरकार यह तय करेगी कि काम कहां मिलेगा। इससे गरीब श्रमिकों की स्वायत्तता खत्म हो गई है। कहा।
उन्होंने आगे बताया कि पहले वर्ष के किसी भी समय काम देना सरकार की जिम्मेदारी थी और ग्रामसभा व पंचायतों को कार्य योजना बनाने का अधिकार था, लेकिन नए कानून में यह अधिकार समाप्त कर दिए गए हैं।
निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र नहीं है विपक्ष
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर नए कानून का जानबूझकर समर्थन करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पास स्वतंत्र निर्णय लेने की आज़ादी नहीं है और वे केंद्र सरकार की नीतियों के अनुसार चल रहे हैं, लेकिन सत्तारूढ़ दल होने के नाते हमारा इस कानून के प्रति स्पष्ट विरोध है। इसलिए इन मुद्दों को राज्यपाल के भाषण में शामिल किया गया था।
राज्यपाल का आचरण असंवैधानिक
मीडिया से वार्ता के मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्र की शुरुआत में आयोजित संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करना राज्यपाल का संवैधानिक कर्तव्य है। संविधान के अनुच्छेद 176 और 163 के अनुसार, राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सलाह पर तैयार भाषण ही पढ़ना होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण न पढ़ना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है और यह जनप्रतिनिधियों की विधानसभा का अपमान है। संविधान लागू होने के बाद से चली आ रही परंपरा के खिलाफ भी है।
मुख्यमंत्री ने किया राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान
सिद्धारमैया ने घोषणा की कि ‘वीबीजी राम जी’ कानून के मुद्दे पर पार्टी, राज्य सरकार, विधायक और एमएलसी पूरे प्रदेश में आंदोलन करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए राज्यपाल का उपयोग कर रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दो टूक कहा कि जैसे पहले किसान विरोधी कानूनों को केंद्र सरकार को वापस लेना पड़ा था, वैसे ही इस नए कानून को भी वापस लेना पड़ेगा। मनरेगा की बहाली तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।
