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पंजाब के डीजीपी ने आतिशी मामले पर रिपोर्ट राज्य के अतिरिक्त सचिव को सौंपी

Date : 29-Jan-2026

 नई दिल्ली, 29 जनवरी । पंजाब के डीजीपी ने आतिशी मामले पर रिपोर्ट को आवश्यक स्वीकृति के लिए राज्य के अतिरिक्त सचिव को सौंप दिया है और दिल्ली विधानसभा को इससे अवगत कराया है। विधानसभा ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी।

विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार दिल्ली विधान सभा सचिवालय को पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से लिखित उत्तर प्राप्त हुआ है। यह उत्तर दिल्ली विधानसभा सचिवालय के 23 जनवरी को भेजे गए पत्र के संदर्भ में है। पत्र में जालंधर पुलिस की प्राथमिकी (एफआईआर) के संबंध में कल तक लिखित जवाब मांगा गया था।

अपने उत्तर में पंजाब के डीजीपी ने सूचित किया है कि इस मामले पर उनका जवाब आवश्यक स्वीकृति हेतु पंजाब सरकार के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को अग्रेषित कर दिया गया है। डीजीपी ने यह भी बताया है कि जालंधर के पुलिस कमिश्नर से प्राप्त लिखित जवाब भी अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेज दिया गया है।

डीजीपी पंजाब के माध्यम से भेजे गए उत्तर में जालंधर के पुलिस आयुक्त ने उल्लेखित किया है कि प्राथमिकी से संबंधित लिखित जवाब प्रस्तुत कर दिया गया है तथा आवश्यक स्वीकृति प्राप्त होने के बाद उसे दिल्ली विधान सभा सचिवालय को भेज दिया जाए।

दिल्ली विधान सभा सचिवालय द्वारा जिन अभिलेखों की मांग की गई है, उनमें पुलिस अधिकारियों से प्राप्त आवेदन तथा पंजाब की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की फॉरेंसिक रिपोर्ट शामिल है। इन दस्तावेजों को सचिवालय द्वारा 16 जनवरी को जारी पत्र के अनुसार 22 जनवरी 2026 तक प्रस्तुत किया जाना था। निर्धारित समय-सीमा तक एफएसएल रिपोर्ट एवं अन्य फॉरेंसिक अभिलेख प्राप्त न होने के कारण सचिवालय द्वारा पुनः स्मरण पत्र जारी किया गया।

दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने यह भी उल्लेख किया है कि निर्धारित तिथि तक फॉरेंसिक अभिलेख प्राप्त न होने के चलते 23 जनवरी 2026 को जारी एक अन्य पत्र के माध्यम से दस्तावेज जमा करने की समय-सीमा बढ़ाकर 28 जनवरी कर दी गई थी और संबंधित अधिकारियों से विस्तारित अवधि के भीतर संपूर्ण फॉरेंसिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया था।

विधान सभा सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि एफएसएल रिपोर्ट सहित फॉरेंसिक अभिलेख मामले के तथ्यों को स्पष्ट रूप से स्थापित करने तथा संस्थागत पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। यह विषय वर्तमान में सक्रिय विचाराधीन है और संबंधित प्राधिकारियों से पूर्ण सहयोग प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।


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