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पन्ना : मिट्टी पर डाली जा रही सीसी सड़क, भुगतान पहले, निर्माण बाद में

Date : 10-Feb-2026

 पन्ना, 10 फरवरी । मध्‍य प्रदेश के पन्ना जिले की रैपुरा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत हरदुआ रावजू में सीसी सड़क निर्माण को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। मुख्य मार्ग से मुक्तिधाम तक बनाई जा रही सीसी सड़क में निर्माण मानकों की खुली अनदेखी की जा रही है। सड़क के नीचे आवश्यक बेस तैयार किए बिना ही सीधे मिट्टी पर सीमेंट-कंक्रीट डाली जा रही है।

ग्रामीणों की शिकायत पर जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची, तो आरोप पूरी तरह सही पाए गए। तकनीकी नियमों के अनुसार सीसी सड़क के नीचे मजबूत आधार होना अनिवार्य है, लेकिन यहां यह प्रक्रिया पूरी तरह गायब मिली।

स्थानीय बेरोजगार, बाहर के मजदूर काम पर

ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण कार्य में लगे मजदूर न तो गांव के हैं और न ही आसपास के क्षेत्र के। गांव में कई आदिवासी परिवार मजदूरी के लिए भटक रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें काम नहीं दिया गया। मौके पर काम करवा रहे व्यक्ति ने कहा कि यह कार्य सरपंच–सचिव से ठेके पर लिया गया है और दर 250 रुपये प्रति वर्ग फीट तय हुई है।

काम शुरू होते ही 7 लाख का भुगतान

पंचायत दर्पण की जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। लगभग 8 लाख रुपये की लागत वाली इस सड़क का कार्य 9 फरवरी से शुरू हुआ, लेकिन इससे पहले ही 7 लाख रुपये की राशि आहरित कर ली गई।

स्वीकृत इस कार्य में 7 फरवरी को एक ही दिन, एक ही वेंडर को पूरा भुगतान कर दिया गया, जबकि निर्माण अभी प्रारंभिक चरण में है।

घटिया निर्माण का विरोध करने पर पुलिस बुलवाई

जब ग्रामीणों ने घटिया निर्माण का विरोध कर काम रुकवाने की कोशिश की और अधिकारियों के निरीक्षण तक कार्य बंद रखने की मांग की, तो सरपंच लक्ष्मण यादव ने 112 पर कॉल कर पुलिस बुला ली। ग्रामीणों का आरोप है कि दबाव बनाकर काम दोबारा शुरू कराने का प्रयास किया गया।

सचिव ने मीडिया से बनाई दूरी

पंचायत भवन में मीडियाकर्मियों को एक और चौंकाने वाला दृश्य देखने को मिला।

केवाईसी के लिए आईं आदिवासी महिलाएं फर्श पर नीचे बैठी थीं, जबकि सचिव कुर्सी पर बैठे रहे। सवाल पूछे जाने पर सचिव भगवत प्रसाद रजक कार्यालय के अंदर चले गए और कहा कि “सरपंच से बात करो, मुझे कुछ नहीं कहना।”

जांच के आदेश

इस मामले पर भगवान सिंह, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत शाहनगर ने कहा

“इंजीनियर को जांच के लिए पंचायत भेजा गया है, मामले को दिखवाया जा रहा है।”

निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल

इस पूरे प्रकरण ने ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया और निगरानी तंत्र की पोल खोल दी है। अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होती है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।


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