कोरबा, 12 फरवरी । एसईसीएल की खदानों में गुरुवार को केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर एक दिवसीय हड़ताल का असर देखा गया। केंद्र सरकार द्वारा लागू चार नई श्रम संहिताओं के विरोaध में विभिन्न श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी सुबह छह बजे से ही खदान क्षेत्रों में पहुंच गए और प्रथम पाली में काम पर जाने वाले कर्मचारियों से ड्यूटी पर न जाने की अपील की।
श्रमिक नेताओं के अनुसार हड़ताल प्रथम पाली में प्रभावी रही और बड़ी संख्या में नियमित कर्मचारी कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं हुए। हालांकि कुछ ठेका कंपनियों के वाहन उत्खनन एवं परिवहन कार्य के लिए निकले, जिन्हें आंदोलनरत प्रतिनिधियों ने रोकने का प्रयास किया। कई ठेका मजदूर भी काम पर नहीं पहुंचे, जबकि कुछ कर्मचारी ड्यूटी पर चले गए।
देश की 10 केंद्रीय मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त रूप से हड़ताल का आह्वान किया था। SECL में मजदूरों का प्रतिनिधित्व कर रहे एचएमएस, इंटक, एटक और सीटू के पदाधिकारी खदान क्षेत्रों में गेट मीटिंग कर कर्मचारियों को आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित करते रहे। पिछले कुछ दिनों से विभिन्न परियोजना क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा था।
साऊथ ईस्टर्न कोयला मजदूर इंटक (एसईकेएमसी ) के केंद्रीय अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह ने कहा कि नई श्रम संहिताएं श्रमिक हितों के प्रतिकूल हैं, जिससे कर्मचारियों में असंतोष है। वहीं सीटू के प्रदेश उपाध्यक्ष सज्जी टी. जान ने दावा किया कि कर्मचारी स्वेच्छा से हड़ताल में शामिल हुए।
आवश्यक सेवाएं रहीं सुचारु-
हड़ताल के बावजूद आवश्यक सेवाएं बाधित नहीं हुईं। अस्पताल, स्कूल, पेयजल और विद्युत आपूर्ति से जुड़े कर्मचारियों को कार्य करने की अनुमति दी गई। परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए स्कूल बस सेवा भी संचालित होती रही।
बीएमएस ने हड़ताल से बनाई दूरी-
भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस ) ने हड़ताल से दूरी बनाए रखी। संगठन के पदाधिकारी एवं सदस्य नियमित रूप से ड्यूटी पर उपस्थित हुए। बीएमएस के महामंत्री रंजय सिंह ने दावा किया कि हड़ताल पूरी तरह सफल नहीं रही और खदानों में कामकाज जारी रहा। उनका कहना है कि हड़ताल कुछ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित थी। उन्होंने कहा कि संगठन ने चारों श्रम संहिताओं का स्वागत किया है, हालांकि कुछ बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई गई है, जिन पर केंद्र सरकार ने सुधार का आश्वासन दिया है।
