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दामोदर नदी पर स्थायी ब्रीज का निर्माण बना चुनावी मुद्दा

Date : 16-Apr-2026

 आसनसोल, 16 अप्रैल ।

दामोदर नदी पर स्थायी ब्रिज निर्माण का मुद्दा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हर राजनीतिक दल का प्रमुख चुनावी एजेंडा बनता दिख रहा है। पिछले सात वर्षों से “दामोदर सेतु बंधन कमेटी” इस मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रही है। कमेटी ने बांकुड़ा और पश्चिम बर्दवान के विभिन्न प्रशासनिक विभागों में कई बार आवेदन किया, लेकिन अब तक पुल निर्माण का सपना साकार नहीं हो सका। हालांकि अब यह आंदोलन आम जनता की भागीदारी से एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है।

बुधवार की रात दामोदर बिहारी नाथ सेतु बंधन कमेटी के फेसबुक पेज पर बिहारी नाथ सेतु का एक फोटो साझा किया गया है। जिस पर लोगों ने अलग-अलग कॉमेंट के माध्यम से खुशी जाहिर की।

चुनावी माहौल में इस मुद्दे की अहमियत और भी बढ़ गई है। सालतोड़ा विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार ने अपने घोषणा पत्र में बामनटोड़ा ग्राम पंचायत के फेरी घाट से नेहरू पार्क तक करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे स्थायी ब्रिज के निर्माण का वादा किया है। वहीं आसनसोल दक्षिण सीट पर उम्मीदवारों ने इसे प्राथमिक मुद्दा बनाते हुए बांकुड़ा, पुरुलिया और पश्चिम बर्दवान को जोड़ने के लिए दामोदर नदी पर सेतु निर्माण की बात कही है।

आसनसोल उत्तर के घोषणा पत्र में भी इस मुद्दे को पहला स्थान दिया गया है, जिसमें क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए बांकुड़ा और आसपास के इलाकों को सीधे जोड़ने हेतु पुल निर्माण को जरूरी बताया गया है। भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने राज्य घोषणा पत्र में दामोदर नदी पर पुल निर्माण का वादा किया है।

भाजपा की ओर से अग्निमित्रा पॉल ने इस मुद्दे को लेकर लंबे समय तक आंदोलन किया और इसे चुनावी एजेंडा बनाया। उन्होंने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और जहाजरानी विभाग के माध्यम से ब्रिज निर्माण के लिए सर्वे भी करवाया, लेकिन नदी की भौगोलिक स्थिति के कारण फेरी सेवा शुरू करना संभव नहीं हो सका।

दूसरी ओर तृणमूल नेता और राज्य के मंत्री मलय घटक ने अगस्त 2021 में लोक निर्माण विभाग के माध्यम से रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड सर्वेयर्स (राइस) को जियोलॉजिकल सर्वे का जिम्मा सौंपा था। इस सर्वे पर करीब 75 लाख रुपये खर्च हुए और एक महीने के भीतर रिपोर्ट भी जमा कर दी गई, लेकिन इसके बाद भी परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।

राज्य सरकार की ओर से वित्तीय अड़चन सबसे बड़ी बाधा बनी रही। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दुर्गापुर के प्रशासनिक बैठक के दौरान दामोदर नदी पर ब्रिज बनाने का से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा था कि यह राज्य सरकार के अधीन नहीं है दामोदर नदी पर ब्रिज केंद्र सरकार को बनाना होगा। वर्तमान समय में इस पुल के निर्माण में लगभग 350 करोड़ रुपये का खर्च का आकलन किया जा रहा है।

दामोदर सेतु बंधन कमेटी के महासचिव चंदन मिश्रा के अनुसार, इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद आंदोलन को नई दिशा मिली और यह एक बड़े जनआंदोलन में तब्दील हो गया। अब क्षेत्र की जनता की नजरें 2026 के चुनाव पर टिकी हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि वर्षों से उठ रही यह मांग आखिरकार जमीन पर उतरती है या फिर एक बार फिर चुनावी वादों तक ही सीमित रह जाती है।

दामोदर नदी पर बने स्थायी बांस का सेतु पर पश्चिम बर्दवान, बांकुड़ा और पुरुलिया के लगभग 300 गांवों की जिंदगी टिकी हुई है। आसनसोल और बर्नपुर के बीच रिवरसाइड घाट पर बना यह स्थायी पुल इन इलाकों के लोगों के लिए रोजमर्रा की आवाजाही का मुख्य साधन है।


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