फतेहाबाद, 05 मई । जिले में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेष जलाने के मामले में इस सीजन की पहली एफआईआर दर्ज की गई है। भूना पुलिस ने मंगलवार को कृषि विभाग की शिकायत पर पांच महिलाओं सहित कुल 7 किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कृषि विभाग के कृषि विकास अधिकारी सोहनलाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (हरसेक) द्वारा 2 मई को खेतों में आग लगने की लोकेशन भेजी गई थी।
सूचना मिलते ही विभाग की एक टीम गठित की गई, जिसमें पटवारी सुनील मोंगा, ग्राम सचिव सूबे सिंह और स्थानीय नंबरदार शामिल थे। टीम ने गांव नाढोड़ी के संबंधित क्षेत्र का दौरा कर मौके का भौतिक निरीक्षण किया। जांच के दौरान टीम ने पाया कि गांव नाढोड़ी के अलग-अलग खसरों में बड़े पैमाने पर गेहूं के अवशेष जलाए गए थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सुनीता देवी ने 25 कनाल एक मरला भूमि, लिछमा देवी ने 5 कनाल 9 मरला भूमि, बंसीलाल, रामकौरी, सीताराम उर्फ सतनारायण, सुमन और पूनम के सांझे खेतों में लगभग 16 कनाल भूमि पर अवशेष जले हुए मिले।
प्रशासन के अनुसार, फतेहाबाद के उपायुक्त ने 30 मार्च को एक आधिकारिक पत्र जारी कर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत फसल अवशेष जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद खेतों में आग लगाकर पर्यावरण नियमों और सरकारी आदेशों की अवहेलना की गई। भूना थाना प्रभारी ओमप्रकाश ने बताया कि कृषि विभाग के एडीओ की शिकायत के आधार पर सातों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने मामले की आगामी जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी सैटेलाइट से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर उल्लंघन करने वालों के खिलाफ इसी तरह की कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
