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गुजरात देश के अग्रणी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में हुआ शामिल

Date : 08-May-2026

 अहमदाबाद, 08 मई। देश के पहले सोलर विलेज मोढेरा के सफल मॉडल के बाद गुजरात अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) यानी बिजली संग्रहण प्रणाली के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। यह जानकारी राज्य सूचना विभागने दी।

मोढेरा के बाद गुजरात में वर्तमान में कुल 5 स्थानों पर 870 मेगावाट क्षमता वाली बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इसके अलावा अहमदाबाद, गांधीनगर, बनासकांठा, पाटन और कच्छ जिलों में 13 नए प्रोजेक्ट्स का रजिस्ट्रेशन भी किया गया है। हाल ही में अहमदाबाद जिले के साणंद तालुका के चराल गांव में नई बैटरी स्टोरेज प्रणाली शुरू की गई है। इसके अलावा महेसाणा के मोढेरा और कच्छ के लखपत सहित अन्य स्थानों पर भी यह व्यवस्था कार्य काम कर रही है।

राज्य सूचना विभाग के बयान के अनुसार मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सोलर पावर प्लांट के साथ बैटरी स्टोरेज प्रणाली को तेजी से विकसित किया गया है। राज्य सरकार ने गुजरात इंटीग्रेटेड रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी-2025 में आधुनिक ऊर्जा संग्रहण प्रणालियों को विशेष महत्व दिया है। इसके तहत स्वतंत्र बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स, नए रिन्यूएबल ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के साथ एकीकृत बैटरी स्टोरेज और मौजूदा ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़े स्टोरेज सिस्टम को मंजूरी दी जा रही है।

क्यों जरूरी है बीईएसएस ?

बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम बिजली को संग्रहित करने का कार्य करता है। सोलर और अन्य रिन्यूएबल स्रोतों से दिन में बिजली उत्पादन अधिक होता है, जबकि शाम के समय उत्पादन कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में दिन के अतिरिक्त उत्पादन को बैटरी में संग्रहित कर शाम के पीक लोड के दौरान उपयोग किया जा सकता है। इससे बिजली ग्रिड पर अचानक बढ़ने वाले दबाव को कम करने और सप्लाई को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलती है।

गुजरात सरकार की स्मार्ट रणनीति

राज्य सरकार प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से कंपनियों को इस क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित कर रही है। बैटरी स्टोरेज सिस्टम को रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स के निकट स्थापित करने की योजना बनाई गई है, ताकि अतिरिक्त ऊर्जा को तुरंत संग्रहित किया जा सके और ट्रांसमिशन लॉस कम हो।



जेटको और बिजली वितरण कंपनियां

ग्रिड क्षमता के अनुसार स्टोरेज सिस्टम के लिए स्थानों का चयन कर रही हैं। यह प्रणाली न केवल बिजली संग्रहण करेगी, बल्कि ग्रिड को वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी सपोर्ट देकर स्थिर बनाए रखने तथा इमरजेंसी बैकअप उपलब्ध कराने में भी सहायक होगी।

राज्य सरकार का मानना है कि इन भविष्य उन्मुख परियोजनाओं के माध्यम से गुजरात वर्ष 2030 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 500 जीडब्ल्यू गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।


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