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नेपाल के नए प्रधान न्यायाधीश की सिफारिश का विरोध, कोर्ट की सुनवाई पर भी दिखा असर

Date : 08-May-2026

 काठमांडू, 08 मई । नेपाल के सर्वोच्च अदालत में वरीयता को दरकिनार करते हुए की गई प्रधान न्यायाधीश की सिफारिश का असर आज सुनवाई में दिखने को मिला है। आज हुई फुल कोर्ट बैठक के चलते दैनिक पेशी के सूची पूर्व निर्धारित समय से लगभग दो घंटे देर से सार्वजनिक हो पाई। प्रस्तावित प्रधान न्यायाधीश को आज सुनवाई से अलग रखा गया, जबकि कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश ने खुद को पेशी से अलग कर लिया।

सर्वोच्च अदालत में शुक्रवार को 14 बेंच निर्धारित की गईं, लेकिन कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल और प्रधान न्यायाधीश पद के लिए सिफारिश किए गए न्यायाधीश डॉ. मनोज कुमार शर्मा किसी भी इजलास में शामिल नहीं हुए। इसी तरह, एक अन्य न्यायाधीश तिलप्रसाद श्रेष्ठ भी आज की इजलास में मौजूद नहीं हैं। बाकी 15 न्यायाधीशों की इजलास का गठन किया गया है।

संवैधानिक परिषद् ने गुरुवार को डॉ. शर्मा को प्रधान न्यायाधीश पद के लिए सिफारिश करने का निर्णय लिया था। कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश मल्ल वरिष्ठता क्रम में पहले स्थान पर थे, लेकिन इसके बावजूद संवैधानिक परिषद् ने चौथे क्रम के शर्मा को चुना। आज हुई फुल कोर्ट बैठक में न्यायाधीशों ने संवैधानिक परिषद् की सिफारिश को लेकर अपने विचार रखे। बैठक में शामिल हुए एक न्यायाधीश के अनुसार परिषद् की यह सिफारिश देश की न्यायपालिका के हित में नहीं है।

बैठक में कुछ न्यायाधीशों ने यह तर्क भी दिया कि संविधान में तीन वर्ष पूरा कर चुके न्यायाधीश को प्रधान न्यायाधीश बनने के योग्य माना गया है, इसलिए उसी प्रावधान के अनुसार हुई सिफारिश को गलत नहीं कहा जा सकता। उनका कहना था कि यदि सिफारिश में कोई त्रुटि या आपत्ति है, तो उसकी जांच करने के लिए संसदीय सुनवाई समिति मौजूद है, इसलिए अभी जल्दबाजी में प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। इसी बैठक के कारण दैनिक पेशी सूची पूर्व निर्धारित समय से लगभग दो घंटे देर से सार्वजनिक की गई।


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