नई दिल्ली, 15 मई । उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने शुक्रवार को कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक प्रगति से नहीं बल्कि सेवा, समावेशिता और उत्तरदायित्व की भावना से संभव है।
उपराज्यपाल संधू आज दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में निष्ठा सोसायटी की ओर से आयोजित “महात्मा हंसराज स्मृति व्याख्यान एवं सम्मान समारोह” को संबोधित कर रहे थे। इसका मुख्य विषय “भारतीय संस्कृति में सेवा और विकास की अवधारणा : विकसित भारत 2047” था। समारोह में सिविल सेवा परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले हंसराज कॉलेज के विद्यार्थियों एवं पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में, उपराज्यपाल ने महात्मा हंसराज के शिक्षा-दर्शन, राष्ट्रसेवा और चरित्र निर्माण के आदर्शों को स्मरण करते हुए कहा, " भारतीय शिक्षा परंपरा केवल ज्ञानार्जन तक सीमित नहीं रही बल्कि उसका उद्देश्य सदैव उत्तरदायी, संवेदनशील और नैतिक नागरिकों का निर्माण करना रहा है। युवाओं को राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाना चाहिए।" देश-विदेश में भारत का प्रतिनिधित्व करते समय उन्होंने अनुभव किया कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सांस्कृतिक जड़ों, नैतिक मूल्यों और युवाशक्ति में निहित होती है। आज विश्व भारत की ओर केवल आर्थिक शक्ति के रूप में नहीं बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक नेतृत्व के केंद्र के रूप में भी देख रहा है।
संधू ने सिविल सेवा में चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति एक बड़े उत्तरदायित्व की शुरुआत है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे प्रशासनिक सेवा को केवल करियर के रूप में न देखें बल्कि जनसेवा और राष्ट्रहित के माध्यम के रूप में ग्रहण करें।
उपराज्यपाल ने मूल्यपरक शिक्षा, चारित्रिक निर्माण और भारतीय संस्कृति आधारित नेतृत्व की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि विकसित भारत सपना तभी साकार होगा जब शिक्षा व्यवस्था ज्ञान के साथ-साथ संवेदना, नैतिकता, अनुशासन और सेवा भाव का भी विकास करे। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीयता, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विकास गुप्ता ने कहा कि सिविल सेवा में चयनित विद्यार्थियों की सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
प्राचार्या प्रो. (डॉ.) रमा ने कहा कि महात्मा हंसराज का जीवन सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व का जीवंत उदाहरण है। विद्यार्थी भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक दृष्टि के समन्वय के साथ आगे बढ़ें।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में चयनित हंसराज कॉलेज के विद्यार्थियों एवं पूर्व छात्रों में साक्षी सक्सेना (रैंक 151), कुमार कनिष्का (रैंक 280), कोमल मावी (रैंक 314), स्वाति आर्या (रैंक 366), अभिषेक मीणा (रैंक 766) तथा आयुष सेमवाल (रैंक 851) प्रमुख रहे। इसके अलावा, यूपीपीएससी परीक्षा में अभय सिंह (रैंक 3), राजू मोदनवाल (रैंक 11), अभिमन्यु सिंह (रैंक 69) तथा आरपीएससी परीक्षा में हार्दिक अग्रवाल (रैंक 375) को भी सम्मानित किया गया। यूपीएससी भारतीय आर्थिक सेवा परीक्षा 2025 में चयनित अभिषेक नेहरा को विशेष रूप से सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान “नारी सेतु भारत” नामक एक नई महिला सशक्तिकरण पहल की भी घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य देशभर में बालिका शिक्षा और महिला नेतृत्व को प्रोत्साहित करना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हंसराज कॉलेज की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) रमा ने की। कार्यक्रम का संयोजन निष्ठा सोसायटी के संयोजक डॉ. प्रभांशु ओझा द्वारा और संचालन दर्शन विभाग की प्राध्यापक डॉ. अनमोलप्रीत कौर ने किया।
