देहरादून, 19 मई । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खंडूड़़ी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका जीवन राष्ट्रसेवा, अनुशासन और ईमानदार राजनीति की मिसाल रहा। जिसने उन्हें उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश की राजनीति में एक अलग पहचान दिलाई। संघर्ष, सादगी और सुशासन की ऐसी विरासत छोड़ गए हैं , जिसे उत्तराखंड लंबे समय तक याद रखेगा। खंडूड़ी के व्यक्तित्व में कठोर अनुशासन और दूसराें के साथ विनम्र व्यवहार का अद्भुत संगम था।
मेजर जनरल (रि.) भुवन चंद्र खंडूड़़ी का जन्म 1 अक्टूबर 1934, देहरादून में हुआ था। उनका मंगलवार को 19 मई 2026, देहरादून (मैक्स हॉस्पिटल) में निधन हाे गया। उनका जीवन सेना की वर्दी से लेकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक, उन्होंने हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा, सादगी और दृढ़ता के साथ निभाया। सैनिक अनुशासन, साफ-सुथरी राजनीति और जनहित के प्रति समर्पण ने उन्हें देश के उन चुनिंदा नेताओं की श्रेणी में खड़ा किया, जिनकी पहचान पद से नहीं, बल्कि कार्यशैली और सिद्धांतों से बनी।
खंडूड़़ी ने अपने जीवन की शुरुआत भारतीय सेना से की थी। वर्ष 1954 में सेना की कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स में शामिल होकर उन्होंने लगभग चार दशक तक राष्ट्रसेवा की। खंडूड़़ी ने प्रारंभिक शिक्षा के बाद इंजीनियरिंग में स्नातक औए डिफेंस मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। सैन्य जीवन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 1991 में वे मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए। तीन युद्धों में देश की रक्षा करते हुए उन्होंने साहस, अनुशासन और नेतृत्व का परिचय दिया। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) से सम्मानित किया गया।
सेना में मेजर जनरल के पद पर सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई। वे गढ़वाल (पौड़ी) संसदीय क्षेत्र से पांच बार लोकसभा सांसद चुने गए। केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री रहते हुए उन्होंने देश की सड़क संपर्क व्यवस्था को नई दिशा दी। ‘स्वर्ण चतुर्भुज’ और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजनाओं को गति देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसे आज भी उनके बड़े योगदान के रूप में याद किया जाता है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी बीसी खंडड़ी ने सादगी और सुशासन की मिसाल पेश की। वे दो बार राज्य के मुख्यमंत्री बने, पहली बार वर्ष 2007 से 2009 तक और दूसरी बार 2011 से 2012 तक। उनके कार्यकाल में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख प्रमुख पहचान बना। खंडूडी ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा का दायित्व माना। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में खंडूड़़ी का कार्यकाल सादगी और सुशासन के लिए विशेष रूप से जाना गया। उन्होंने प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी को प्राथमिकता दी। मजबूत लोकायुक्त व्यवस्था और भ्रष्टाचार विरोधी पहल उनके शासन की प्रमुख पहचान बनी। वे उन नेताओं में रहे जिन्होंने सरकारी तामझाम से दूरी बनाकर आम जनता से सीधा संवाद कायम रखा। उन्होंने सत्ता को कभी व्यक्तिगत सुविधा का माध्यम नहीं बनाया। उनका सादा जीवन, स्पष्टवादिता और राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की कार्यशैली जनता के बीच उन्हें विशेष सम्मान दिलाती रही।
बीसी खंडूड़़ी के व्यक्तित्व में कठोर अनुशासन और विनम्र व्यवहार का अद्भुत संगम था। वे कम बोलते थे, लेकिन उनके निर्णय और कार्यशैली लोगों के बीच गहरी छाप छोड़ते थे। राजनीति में भी उन्होंने सैनिक मूल्यों को जिया और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। जनकेंद्रित प्रशासनिक सुधारों को लेकर उन्होंने कई महत्वपूर्ण पहल कीं। खंडूड़ी का जीवन सेना से राजनीति तक राष्ट्र और समाज की निस्वार्थ सेवा को समर्पित रहा। उनका जाना उत्तराखंड के सार्वजनिक जीवन में एक ऐसे अध्याय का अंत है, जिसकी पहचान संघर्ष, सादगी और सुशासन रही।
