हिमाचल की पंचायतों में युवाओं का जलवा : कहीं 22 साल की कॉलेज छात्रा बनी प्रधान, कहीं एमए-एलएलएम युवाओं ने संभाली कमान | The Voice TV

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आचार्य चाणक्य: "समय और शिक्षा का सही उपयोग ही व्यक्ति को सफल बना देता है।"

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हिमाचल की पंचायतों में युवाओं का जलवा : कहीं 22 साल की कॉलेज छात्रा बनी प्रधान, कहीं एमए-एलएलएम युवाओं ने संभाली कमान

Date : 29-May-2026

 शिमला, 29 मई । हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में वीरवार को 1276 पंचायतों में मतदान हुआ और देर रात कई पंचायतों में नई तस्वीर सामने आई। इस बार चुनावी नतीजों में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि गांव की सरकार की कमान बड़ी संख्या में शिक्षित युवाओं के हाथों में पहुंचती दिखी। कई पंचायतों में 22 से 25 साल की युवतियां और युवा प्रधान चुने गए हैं। कोई यूजीसी नेट की तैयारी कर रहा है, कोई न्यायिक सेवाओं का सपना देख रहा है, तो कोई पढ़ाई पूरी कर गांव के विकास की जिम्मेदारी संभालने जा रहा है।

22 साल की तारादेवी बनीं सबसे युवा प्रधान

शिमला जिला के ठियोग विकास खंड की नहौल पंचायत में 22 साल की तारादेवी निर्विरोध प्रधान चुनी गई हैं। उनका जन्म 2004 में हुआ और वे अभी इग्नू शिमला से सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रही हैं। परिवार में पहले कभी किसी ने चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन पंचायत में महिला सीट आरक्षित होने के बाद गांव वालों ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए आगे किया। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी तारादेवी के पिता का पहले ही निधन हो चुका है। वे कहती हैं कि शपथ लेने के बाद घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनेंगी और पंचायत के सम्पूर्ण विकास पर काम करेंगी।

23 साल के इंद्र सिंह ने संभाली सरपारा पंचायत की कमान

रामपुर ब्लॉक की सरपारा पंचायत में 23 साल के इंद्र सिंह प्रधान बने हैं। उन्होंने करीब 70 वोटों से जीत दर्ज की। इंद्र सिंह ने अंग्रेजी विषय में एमए किया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद अब वे गांव की राजनीति में नई सोच के साथ उतरे हैं। उनका कहना है कि पंचायत में खराब रास्तों की हालत सुधारना, टॉयलेट की सुविधा बढ़ाना और लोगों के लिए रेन शेल्टर बनाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

चौगान पंचायत में आंचल की बड़ी जीत

शिमला जिला के कोटखाई विकास खंड की चौगान पंचायत में 23 साल की आंचल ने 160 वोटों से जीत दर्ज कर सबका ध्यान खींचा। उन्होंने संजौली कॉलेज से अंग्रेजी में मास्टर्स की पढ़ाई की है। उनके पिता बागवानी से जुड़े हैं, जबकि छोटा भाई कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है। आंचल छात्र राजनीति में एबीवीपी से जुड़ी रहीं और पढ़ाई के बाद शिमला में निजी क्षेत्र में नौकरी भी की। पंचायत चुनाव में महिला सामान्य सीट आरक्षित होने पर गांव वालों ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया। आंचल कहती हैं कि उनकी पंचायत नई बनी है और यहां पंचायत भवन, डिस्पेंसरी, पक्के रास्ते और स्ट्रीट लाइट जैसी मूल सुविधाओं की कमी है। अब उनकी प्राथमिकता इन्हीं सुविधाओं को गांव तक पहुंचाना है।

लॉ ग्रेजुएट ऋचा शर्मा,आठवीं कक्षा से था राजनीति का शौक, अब बनीं प्रधान

ठियोग ब्लॉक की शड़ी जोधपुर पंचायत से 24 साल की ऋचा शर्मा प्रधान बनी हैं। उन्होंने त्रिकोणीय मुकाबले में 108 वोटों से जीत दर्ज की। ऋचा ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई की है और मास्टर्स भी किया है। फिलहाल वे न्यायिक सेवाओं की तैयारी कर रही हैं। उनके परिवार का अपना कारोबार है और भाई-बहन भी उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं। ऋचा बताती हैं कि उन्हें आठवीं कक्षा से राजनीति में रुचि थी। अब प्रधान बनने के बाद उनकी प्राथमिकता इलाके की पानी की समस्या दूर करना, खराब रास्तों को सुधारना और महिलाओं व युवतियों के लिए स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम शुरू करना है, ताकि वे घरों तक सीमित न रहें।

यूजीसी नेट की तैयारी कर रहीं पाखी शर्मा बनीं प्रधान

चौपाल की लिंगजार पंचायत में 25 साल की पाखी शर्मा 54 वोटों से जीतकर प्रधान बनी हैं। उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में मास्टर्स किया है और फिलहाल यूजीसी नेट की तैयारी कर रही हैं। उनके पिता प्रॉपर्टी डीलर हैं। पाखी कहती हैं कि पंचायत में लोगों की छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान करना और गांवों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर बनाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। खराब रास्तों और विकास कार्यों पर भी वे विशेष ध्यान देना चाहती हैं।


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