भुवनेश्वर, 04 जून। ओडिशा में तकनीकी शिक्षा के विस्तार और ढेंकानाल-अंगुल औद्योगिक क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर ढेंकानाल जिले के प्रतिष्ठित तकनीकी शिक्षण संस्थान इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईजीआईटी), सरांग को एक स्वतंत्र एकल विश्वविद्यालय (यूनिटरी यूनिवर्सिटी) के रूप में उन्नत करने का अनुरोध किया है।
अपने पत्र में प्रधान ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बजट 2026-27 में वीर सुरेंद्र साई प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (वीएसयूटी), बुरला और ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च (ओयूटीआर), भुवनेश्वर को विश्वस्तरीय तकनीकी विश्वविद्यालयों के रूप में विकसित करने का निर्णय सराहनीय है। इसी क्रम में आईजीआईटी सरांग को भी समान स्तर पर उन्नत किए जाने की आवश्यकता है।
केंद्रीय मंत्री ने पत्र में उल्लेख किया कि वर्ष 1982 में स्थापित आईजीआईटी सरांग का लगभग 45 वर्षों का गौरवशाली इतिहास रहा है। संस्थान को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा स्वायत्तता प्राप्त है, जबकि इसे अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की मान्यता और राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनबीए) की स्वीकृति भी प्राप्त है। इसके अलावा संस्थान तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम (टीईक्यूआईपी) के तहत भी समर्थित रहा है, जो इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता और संस्थागत क्षमता को दर्शाता है।
आईजीआईटी में पीएचडी, एमटेक, एमसीए, बीटेक, बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर, एमएससी तथा डिप्लोमा सहित विभिन्न उच्चस्तरीय पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। संस्थान में योग्य एवं अनुभवी शिक्षकों की मजबूत टीम तथा उत्कृष्ट शैक्षणिक आधारभूत संरचना उपलब्ध है।
प्रधान ने कहा कि छात्रों के कौशल विकास और शोध क्षमताओं को बढ़ाने के लिए संस्थान ने आईआईटी बॉम्बे के साथ वर्चुअल लैब कार्यक्रम तथा भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के साथ इंटर्नशिप अवसरों के क्षेत्र में सफल साझेदारी स्थापित की है।
उन्होंने बताया कि आईजीआईटी सरांग की भौगोलिक स्थिति इसे विशेष महत्व प्रदान करती है। ढेंकानाल और अंगुल के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के बीच स्थित यह संस्थान उद्योग आधारित अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से क्षेत्रीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की व्यापक क्षमता रखता है।
पत्र में केंद्रीय मंत्री ने तर्क दिया कि आईजीआईटी को एकल विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने से उसकी शैक्षणिक स्वायत्तता बढ़ेगी, उन्नत शोध और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा तथा बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। इससे देशभर के प्रतिभाशाली शिक्षकों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करने में मदद मिलेगी, साथ ही संस्थान को अधिक वित्तीय संसाधन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां प्राप्त हो सकेंगी।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आईजीआईटी सरांग को विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करना केवल ओडिशा की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं करेगा, बल्कि राज्य के औद्योगिक विकास, अनुसंधान और नवाचार को भी नई गति प्रदान करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘विकसित ओडिशा 2036’ के विजन के अनुरूप इस संस्थान को अंतरराष्ट्रीय स्तर के तकनीकी शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
