कोलकाता, 04 जून । नगर पालिका भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में न्यायिक हिरासत में बंद पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता सुजीत बोस ने अदालत में प्रथम श्रेणी बंदी (ग्रेड वन प्रिजनर) का दर्जा दिए जाने की मांग की है। गुरुवार को हुई वर्चुअल सुनवाई में उनके वकील ने अदालत के समक्ष यह आवेदन प्रस्तुत किया। इस पर प्रवर्तन निदेशालय ने लिखित रूप से आपत्ति दर्ज कराई।
सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से उप सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने अदालत को बताया कि आरोपितों ने इस मामले में पहले ही उच्च न्यायालय का रुख किया है। उन्होंने यह भी कहा कि सुजीत बोस से कथित रूप से जुड़े दक्षिण दमदम नगर पालिका के उप प्रमुख निताई दत्ता को पूछताछ के लिए समन भेजा गया था, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए हाजिरी से छूट मांगी और अब तक पेश नहीं हुए हैं।
ईडी ने अदालत को यह भी बताया कि जांच के दौरान भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अभ्यर्थियों की सूची बरामद की गई है और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। एजेंसी ने कहा कि उसे हाल ही में कुछ नई जानकारियां मिली हैं, जिनकी पुष्टि के लिए पूछताछ आवश्यक है, लेकिन बार-बार समन के बावजूद कुछ लोग पेश नहीं हो रहे हैं। ईडी ने आरोप लगाया कि सुजीत बोस एक प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति हैं, जिसके कारण जांच प्रभावित हो रही है।
दूसरी ओर, सुजीत बोस के वकील ने दलील दी कि केंद्रीय जांच ब्यूरो की चार्जशीट में उनके मुवक्किल का नाम शामिल नहीं है और न ही किसी वित्तीय लेनदेन का उल्लेख है। बचाव पक्ष का यह भी कहना था कि अन्य आरोपितों के बयान में भी सुजीत बोस की भूमिका स्पष्ट नहीं होती है।
