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चमियाना सुपर स्पेशियलिटी में रोजाना पहुंच रहे एक हज़ार से ज्यादा मरीज, जल्द लगेगी 25 करोड़ रुपये की एमआरआई मशीन

Date : 09-Jun-2026

 शिमला, 09 जून। राजधानी शिमला के चमियाना स्थित अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटीज (एआईएमएसएस) अब प्रदेश में उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। अस्पताल में रोजाना एक हजार से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। मंगलवार को पत्रकार वार्ता में एआईएमएसएस शिमला के प्रधानाचार्य डॉ. बृज शर्मा और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधीर शर्मा ने अस्पताल की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि अस्पताल में न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, एंडोक्राइनोलॉजी, सीटीवीएस और कार्डियक एनेस्थीसिया जैसी सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं उपलब्ध हैं।

एक महीने में 12 हजार से ज्यादा मरीज, सैकड़ों जांचें और भर्ती

डॉ. बृज शर्मा ने कहा कि अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या इसकी उपयोगिता को दर्शा रही है। मई 2026 के दौरान यहां 12,267 मरीजों ने ओपीडी सेवाओं का लाभ लिया, जबकि 975 मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया गया। रेडियोलॉजी विभाग में अब तक 737 अल्ट्रासाउंड, 548 सीटी स्कैन और 2,176 एक्स-रे किए जा चुके हैं। उनका कहना है कि मरीजों को एक ही छत के नीचे आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास लगातार जारी है।

24 घंटे लैब, ब्लड स्टोरेज और इमरजेंसी सेवा, रोबोटिक सर्जरी ने बनाई अलग पहचान

डॉ. बृज शर्मा व व डॉ. सुधीर शर्मा ने कहा कि पिछले छह महीनों में अस्पताल में कई महत्वपूर्ण सुविधाएं शुरू की गई हैं। इनमें 24 घंटे इंडोर लैब, 24 घंटे ब्लड स्टोरेज सेंटर, 24 घंटे सीटी स्कैन और एक्स-रे सेवा, डायलिसिस सुविधा तथा आपातकालीन सेवाएं शामिल हैं। अस्पताल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में राज्य की पहली रोबोटिक सर्जरी सुविधा भी है। मुख्यमंत्री की पहल पर करीब 29 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस यूनिट में 11 अगस्त 2025 से अब तक 245 रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी हैं। इसके लिए 2.54 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि उपभोग्य सामग्री खरीदने के लिए भी स्वीकृत की गई है।

अब 25 करोड़ की एमआरआई और ऑटोमेटेड लैब की तैयारी, स्टाफ भी बढ़ेगा

डॉ. सुधीर शर्मा ने बताया कि आने वाले समय में यहां और अत्याधुनिक सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत वाली थ्री-टेस्ला एमआरआई मशीन अगले एक महीने में स्थापित होने की संभावना है। इसके अलावा 25 करोड़ रुपये की लागत वाली ट्रैक आधारित ऑटोमेटेड लैब और 10 करोड़ रुपये की डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (डीएसए) मशीन को भी मंजूरी मिल चुकी है। अस्पताल में सेवाओं को मजबूत करने के लिए 100 स्टाफ नर्स, 10 लैब तकनीशियन, 10 रेडियोग्राफर और 10 ओटी असिस्टेंट के पद आउटसोर्स आधार पर स्वीकृत किए गए हैं। वहीं, चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत आठ सहायक प्रोफेसरों के पद भी हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से भरे जाएंगे। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक के साथ मरीजों को बेहतर और समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है।


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