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कोलाघाट में मुख्यमंत्री शुभेंदु की प्रशासनिक बैठक में दिखे कई तृणमूल नेता

Date : 09-Jun-2026

 कोलकाता, 09 जून । पश्चिम बंगाल के कोलाघाट में मंगलवार को बलाका मंच पर आयोजित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की एक अहम प्रशासनिक बैठक उस समय राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई, जब कथित रूप से ‘विद्रोही खेमे’ से जुड़े तृणमूल कांग्रेस के विधायक और सांसद भी इसमें शामिल हुए। पूर्व मिदनापुर, पश्चिम मिदनापुर और झाड़ग्राम इन तीन जिलों को लेकर आयोजित इस बैठक में जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ प्रशासनिक और पुलिस के शीर्ष अधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

बैठक में केशपुर की विधायक शिउली साहा, मिदनापुर की तृणमूल सांसद जून मालिया और घाटाल के सांसद दीपक अधिकारी (देव) की उपस्थिति सामने आई। बताया जा रहा है कि ये सभी हाल के दिनों में पार्टी के भीतर ‘विद्रोही खेमे’ से जुड़े माने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के बैठक में पहुंचने के बाद देव भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

प्रशासनिक स्तर पर इस बैठक में तीन जिलों के जिलाधिकारी, अतिरिक्त जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी और खंड विकास अधिकारी मौजूद रहे। इसके साथ ही पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, थाना प्रभारी और पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य विकास योजनाओं की प्रगति, जनकल्याणकारी परियोजनाओं की समीक्षा, प्रशासनिक समन्वय और कानून-व्यवस्था की स्थिति की विस्तृत समीक्षा बताया गया।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, बुनियादी ढांचे के विकास, जनता तक सेवाओं की पहुंच और क्षेत्रीय विकास कार्यों की गति को लेकर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा आने वाले समय की रणनीति और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर भी दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।

राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को विशेष रूप से इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें विपक्षी खेमे से जुड़े माने जाने वाले जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इसे लेकर कई तरह के सियासी संकेत भी निकाले जा रहे हैं।

तृणमूल विधायक शिउली साहा ने कहा कि बैठक में आमंत्रित किए जाने पर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में अब विपक्षी विधायकों को भी प्रशासनिक बैठकों में शामिल किया जा रहा है, जो एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता द्वारा चुना जाता है और विकास से जुड़े निर्णयों में उनकी भागीदारी जरूरी है।


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