नई दिल्ली, 16 अगस्त । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. बिंदेश्वर पाठक के निधन पर शोक जताया है। संघ के सरकार्यवाह दतात्रेय होसबाले ने कहा है कि पिछले पांच दशकों में इस संस्थान ने करोड़ों लोगों को सहज और स्वच्छ शौचालय उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संघ के प्रचार विभाग की ओर से जारी वक्तव्य में होसबाले ने कहा कि देश में स्वच्छता के उद्देश्य के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले बिंदेश्वर पाठक नहीं रहे। 1968 में उन्होंने डिस्पोजल कंपोस्ट शौचालय का आविष्कार किया था। उन्होंने सिर पर मैला ढोने की प्रथा की समाप्ति में निर्णायक भूमिका निभाई थी। वर्ष 1970 में उन्होंने 'सुलभ इंटरनेशनल' की स्थापना की। पाठक के अनथक प्रयासों से आज देशभर में उनकी संस्था द्वारा निर्मित 8500 सुलभ शौचालय और स्नानघर हैं। सेवाकार्यों के लिए पद्म भूषण से अलंकृत डॉ. पाठक को प्रभु अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें, हम ऐसी प्रार्थना करते हैं।
डॉ. पाठक का अंतिम संस्कार बुधवार पूर्वाह्न 11 बजे दिल्ली के लोधी रोड स्थित शमशान घाट पर किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए। अस्सी वर्षीय डॉ. पाठक का मंगलवार को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया था। सुबह सुलभ इंटरनेशनल के केंद्रीय कार्यालय में ध्वजारोहण के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें एम्स ले जाया गया, जहां उनका निधन हो गया। वह बिहार के वैशाली जिले के रहने वाले थे।
