जमीअत उलेमा हिंद का प्रतिनिधिमंडल नूंह एसपी से मिला, निर्दोषों की गिरफ्तारी पर रोक की मांग | The Voice TV

Quote :

असफलताओं के बावजूद, अपना मनोबल ऊँचा रखें. अंत में सफलता आपको अवश्य मिलेगी । “ - धीरूभाई अंबानी

National

जमीअत उलेमा हिंद का प्रतिनिधिमंडल नूंह एसपी से मिला, निर्दोषों की गिरफ्तारी पर रोक की मांग

Date : 09-Sep-2023

 नई दिल्ली/नूंह, 09 सितंबर । जमीअत उलमा-ए-हिंद के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को नूंह के पुलिस अधीक्षक (एसपी) नरेंद्र बिजारणिया से मुलाकात की और नूंह में हुए सांप्रदायिक दंगों पर चर्चा की। इसके साथ ही नूंह में मनमाने ढंग से की गई गिरफ्तारियों पर भी एसपी से शिकायत दर्ज की और कहा कि निर्दोष लोगों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए।

जमीअत उलमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने आज अपने वकील मोहम्मद ताहिर रोपड़िया से भी मुलाकात की, जो जमीअत उलमा-ए-हिंद की ओर से उत्पीड़ित और निर्दोष लोगों के मुकदमे लड़ रहे हैं। नूंह दंगों में अब तक 320 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें निर्दोषों की बड़ी संख्या प्रतीत होती है। वकील ताहिर ने बताया कि अब तक 150 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनके मुकदमे लड़े जा रहे हैं। जमीअत उलमा के प्रयासों से कुछ लोगों को जमानत भी मिली है और कुछ को रिहा भी कर दिया गया है।

दरअसल, गत सप्ताह नूंह में जमीअत उलमा-ए-हिंद के कानूनी मामलों के प्रभारी मौलाना नियाज़ अहमद फारूकी के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें एडवोकेट मोहम्मद ताहिर रोपड़िया को केस लड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस संबंध में जमीअत उलमा के स्थानीय पदाधिकारियों पर आधारित एक कानूनी समिति का गठन किया गया है।

जमीअत उलमा के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी ने बताया कि जमीअत उलमा चार मोर्चों पर लगातार काम कर रही है, जिसमें मस्जिदों की मरम्मत का कार्य जारी है। अब तक चार मस्जिदों की मरम्मत का काम पूरा हो चुका है और उनका उद्घाटन भी हो चुका है। इसके अलावा जिन गरीब लोगों के मकान सरकारी बुलडोजर के शिकार हुए हैं, उनके लिए घरों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। निर्दोष होने के बावजूद गिरफ्तार किए गए 150 लोगों का केस जमीअत उलमा लड़ रही है। आगे भी संपर्क करने वालों की ओर से भी केस लड़ेंगे।

उन्होंने बताया कि दंगों से प्रभावित छोटे कारोबारियों के लिए रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करने के रास्ते बंद हो गए हैं, उनके लिए रेहड़ी, खोमचे और अन्य वित्तीय संसाधन लगातार मुहैया करवाए जा रहे हैं।मौलाना कासमी ने बताया कि अभी तीन साल पहले ही दिल्ली में भयानक सांप्रदायिक दंगे हुए थे। इसके बाद जमीअत उलमा-ए-हिंद ने 165 घरों और 224 दुकानों का पुनर्निर्माण या मरम्मत करवाने के बाद जरूरतमंदों को सौंप दिए थे। जमीअत के प्रयासों से ज्यादातर लोग जमानत पर बाहर आ गए हैं, लेकिन उनके केस अभी भी अदालत में लंबित हैं।


RELATED POST

Leave a reply
Click to reload image
Click on the image to reload









Advertisement