मध्य प्रदेश में हिन्दू विरोध का नैरेटिव सेट करती एक महिला अफसर
Date : 23-Oct-2024
बोलनेवाले बहुत कुछ बोलते हैं । आज के समय में सोशल मीडिया अपनी बात रखने का एक सशक्त माध्यम भी है। ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के अलावा भी कई और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैं जहां लोग कुछ न कुछ सर्च करते रहते हैं या अपनी बातें रख रहे होते हैं। इस साल के अंत तक दुनिया में 5.17 बिलियन लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे होंगे। यदि भारत की बात की जाए तो करीब 516.92 मिलियन लोग इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करते हैं। तकरीबन 492.70 मिलियन लोग फ़ेसबुक का इस्तेमाल करते हैं। भारत में 820 मिलियन से अधिक लोग इंटरनेट का यूज़ करते हैं। यहां ये आपके ऊपर है कि आप इस सोशल मीडिया उपयोग कैसे करते हैं । एक ओर जहां कई लोग इसका उपयोग सकारात्मक दिशा और सही विषयों को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं, तो वहीं एक बड़ी संख्या उन लोगों की भी है, जिसमें वे इसका उपयोग अपने नैरेटिव को सेट करने में करते हैं।
जब एक यूजर्स ने उन्हें तीखे तरीके से घेरा तो वे अपने संस्कारों की दुहाई देती नजर आईं, इन्होंने कहा, “कम से कम मेरे माता पिता और मिशनरियों ने मुझे सभ्य भाषा का इस्तेमाल करना और निष्पक्ष रूप से बोलना तो सिखाया है। इसका मुझे गर्व है। अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वालों के लिए यहाँ कोई जगह नहीं है। इसलिए आपको बाइज़्ज़त यहाँ से रवाना किया जा रहा है।” अब देखिए, इन्होंने अपने को निष्पक्ष रूप से बोलना करार दिया है, लेकिन इनकी निष्पक्षता सिर्फ हिन्दू धर्म को कोसने तक ही सीमित नजर आती है। एक घटना सहरानपुर में घटी थी, जिसमें कांवड़ियों ने कुछ कांवड़ खंडित होने पर बाइक में तोड़फोड़ की तो इसका वीडियो साझा करते हुए मार्टिन ने लिखा, “कांवड़ यात्रा के लिए एक डेडीकेटेड कॉरिडोर होना चाहिए।” वहीं, एक जगह लिखा- “बिल्कुल बहिष्कार कीजिए। कांवड़ियों को सतर्क भी कर दीजिए कि व्रत में सेंधा नमक का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। आप तो जानते ही होंगे सेंधा नमक कहां से आता है।” राजस्थान के सीकर में बलात्कार के मामले को सदफ अफरीन नाम की मुस्लिम आईडी से एक्स पर एक वीडियो शेयर किया गया, जिसमें बालकनाथ है और जिसका कि हिन्दू समाज में बेहद विरोध हुआ, फिर भी ये अधिकारी शैलबाला उसे अपने ट्वीटर हेंडल से शेयर करते हुए बहुत ही होशियारी से कमेंट करती हैं और हिन्दू संत समाज के विरोध में नैरेटिव गढ़ने का काम करती नजर आती हैं। बात यह है कि उन्हें यही दिखा जबकि वे अपने को निष्पक्ष करने का दंभ भरती हैं। इसके अलावा मप्र में पिछले दिनों ईसाई मिशनरी और इस्लाम से जुड़ी अनेक घटनाएं सामने आईं। सिर्फ मप्र में ही क्यों, देश भर में ऐसी घटनाओं की भरमार है, लेकिन ये जानबूझकर सिर्फ हिन्दू समाज से जुड़े ही नकारात्मक मामले को अपना विषय बनाती हैं। मजाल है कि इस अधिकारी को वह कोई एक घटना दिखे (इस्लाम-ईसाईयत) और ये अपने एक्स प्लेटफार्म पर उसे शेयर करें। हालांकि जो गलत है वह गलत है, हम ये कह रहे हैं कि अपने को फिर निष्पक्ष मत कहो।