अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव: गीता की विश्व यात्रा | The Voice TV

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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव: गीता की विश्व यात्रा

Date : 07-Jan-2026

पांच शताब्दियों से भी पूर्व भगवान श्रीकृष्ण का ‘भगवद् गीता’ के रूप में अर्जुन को दिया गया शाश्वत उपदेश का आज विश्व भर में प्रसार हो चुका है। आज यह विश्व के सर्वाधिक सम्मानित आध्यात्मिक ग्रंथों में से एक है। इसी प्रकार, कुरुक्षेत्र स्थित पावन ब्रह्म सरोवर में प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव भी एक क्षेत्रीय आयोजन न रह कर, अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आंदोलन बन चुका है जो हर महाद्वीप में गीता के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है।

आध्यात्मिक चेतना जगाने वाले गीता महोत्सव का आयोजन, हरियाणा सरकार ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के माध्यम से वर्ष 1989 में आरम्भ किया। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गीता का सन्देश समूचे विश्व में पहुंचाने के उद्देश्य से इस आयोजन को अन्तरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का रूप दिए जाने की इच्छा व्यक्त की। इसी के अनुरूप हरियाणा सरकार ने वर्ष 2016 में प्रथम अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव आयोजित किया जिसका उद्देश्य गीता का शांति, सद‌्भाव और सार्वभौमिक बंधुत्व का शाश्वत सन्देश सम्पूर्ण मानवता तक पहुंचाना था।

गीता के सन्देश ने विश्व भर में जो गूंज पैदा की उसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन यूनाइटेड किंगडम, मॉरीशस, कनाडा, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया सहित विश्व के 30 से अधिक देशों में किया जा चुका है। यह महोत्सव धीरे-धीरे एक वैश्विक मंच के रूप में विकसित हो रहा है जिसमें यूरोप, मध्य एशिया, उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका तथा मध्य-पूर्व के देश शामिल हो रहे हैं। गीता की वैश्विक यात्रा में एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण उपलब्धि सऊदी अरब में आयोजित महोत्सव रहा है।

महोत्सव के अंतर्गत गीता को ओटावा में कनाडा की संसद, लंदन के हाउस ऑफ कॉमंस तथा अन्य देशों के इसी प्रकार के प्रमुख सरकारी प्रतिष्ठानों में रखा गया। इतना ही नहीं, ब्रैम्पटन (कनाडा) और लेस्टर (यूके) शहरों ने अपने एक नगर उद्यान का नाम श्रीमद‌्भगवद् गीता पार्क रखा है, तथा विश्व के कुछ प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में गीता पीठ भी स्थापित की गई है।

वर्ष 2025 में विदेश मंत्रालय एक प्रमुख साझेदार के रूप में आगे आया और इसने महोत्सव को व्यापक सहयोग दिया। विश्वभर में स्थित भारतीय मिशनों के साथ समन्वय करके विदेश मंत्रालय ने महोत्सव को और सशक्त किया, अंतरराष्ट्रीय सहभागिता आसान की तथा गीता को शांति व सद‌्भाव के सार्वभौमिक ग्रंथ के रूप में प्रस्तुत करके भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को नई ऊंचाई दी।

वास्तव में, महोत्सव का वैश्विक स्वरूप बनने से बहुत पहले ही अनेक विदेशी विद्वान और दार्शनिक, गीता का सन्देश गहराई से समझ कर इसकी सराहना कर चुके थे। वेदों और उपनिषदों का लैटिन में अनुवाद करने वाले जर्मन दार्शनिक मैक्स मूलर, गीता में निहित ‘सर्वोच्च ज्ञान’ को अत्यंत मूल्यवान मानते थे।

एक अन्य जर्मन दार्शनिक आर्थर शोपेनहावर गीता से अत्यंत प्रभावित थे और उन्होंने इसकी शिक्षाओं में वैराग्य के माध्यम से मुक्ति का मार्ग पाया था। उन्होंने इसे ‘विश्व के पास प्रदर्शित करने योग्य सबसे गहन और सर्वोच्च वस्तु’ बताया और भौतिक जगत को क्षणभंगुर एवं माया बताने वाली इसकी विवेचना में गहरा साम्य पाया। वे गीता से इतने अधिक अभिभूत थे कि इसे एक उदात्त दार्शनिक गीत, गहन आध्यात्मिक मार्गदर्शक और प्राचीन ज्ञान का सशक्त साक्षी मानते हुए ‘गीता’ को सिर पर रखकर बर्लिन की गलियों में दौड़े थे।

अपने बहुप्रशंसित ‘मन की बात’ कार्यक्रम के नवम्बर 2025 के अंक में प्रधानमंत्री ने भगवद् गीता की वैश्विक अनुगूंज रेखांकित की। उन्होंने कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में विश्वभर से प्रतिभागियों के सम्मिलित होने का उल्लेख किया। उन्होंने सऊदी अरब, लात्विया तथा अन्य देशों में हाल में हुए आयोजनों का उल्लेख करते हुए बताया कि अनेक देश गीता के शांति और करुणा के सन्देश से प्रेरणा पा रहे हैं।प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा, “कुरुक्षेत्र के ब्रह्म सरोवर पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल होना मेरे लिए विशेष रहा। मैं यह देख कर बहुत प्रभावित हुआ कि कैसे दुनिया भर के लोग दिव्य ग्रंथ ‘गीता’ से प्रेरित हो रहे हैं।”

देश-विदेश से भारी संख्या में लोगों को आकर्षित करने वाले इस महोत्सव की प्रमुख विशेषताओं में आरती एवं दीपोत्सव, गीता यज्ञ और गीता पाठ, गीता का वैश्विक सामूहिक उच्चार (साल 2025 में 21,000 विद्यार्थियों सहित 1,00,000 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन भाग लिया), गीता सद‌्भावना यात्रा, पुस्तक, शिल्प एवं खाद्य मेले, रन फॉर गीता तथा गीता क्विज शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, सर्वधर्म संत सम्मेलन का आयोजन भी होता है जिसमें विभिन्न धर्मों तथा विश्व के अलग-अलग क्षेत्रों से आए विद्वान, गीता की महिमा का गुणगान करते हैं और बताते हैं कि वर्तमान अशांत एवं संघर्षरत विश्व में, गीता का सन्देश कैसे मानवता के लिए सहायक हो रहा है। यह तथ्य रेखांकित करता है कि गीता किसी एक धर्म की न होकर सम्पूर्ण मानवता की धरोहर है और कैसे यह दिव्य ग्रंथ सभी को एकजुट करने में भूमिका निभा सकता है। इस वर्ष महोत्सव को अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने में विदेश मंत्रालय ने निर्णायक भूमिका निभाई और गीता सम्मेलन में 25 प्रतिष्ठित विदेशी विद्वानों की सहभागिता सुनिश्चित हुई।

एक सार्वभौमिक ग्रंथ

भगवद् गीता के सन्देश का सर्वमान्य स्वरूप और सर्वव्यापकता इसे एक सार्वभौमिक ग्रंथ बनाती है। यह किसी एक धर्म से सम्बंध नहीं रखती। गीता, मानव को जीने की कला सिखाती है और कर्मयोग (निःस्वार्थ कर्म का मार्ग), भक्ति (समर्पण) तथा सांख्य (ज्ञान) जैसे इसके उपदेश विश्व भर के साधकों को आकर्षित करते हैं। यह निष्काम भाव से लाभ-हानि तथा जय-पराजय जैसी गणनाओं से ऊपर उठकर, कर्म करने का महान सन्देश देती है। गीता में ‘धर्म’ शब्द किसी सम्प्रदाय या धर्म विशेष का द्योतक नहीं है। यह तो कर्त्तव्य, नैतिक एवं आचारिक मूल्यों तथा सामाजिक व्यवस्था का प्रतीक है जो एक प्रकाश-स्तम्भ के रूप में मानवता की सेवा करता है। कई अन्य देशों में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन करने के लिए कुछ सजग और ठोस उपाय किए गए।


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