भारत ने लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट (LDLT) के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व स्थापित किया है। विशेषज्ञों ने यह बात लिवर ट्रांसप्लांटेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (LTSICON 2025) के वार्षिक सम्मेलन में कही, जो 20 से 23 नवंबर तक नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
GODT और NOTTO के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2024 में लगभग 5,000 लिवर ट्रांसप्लांट किए गए और देश में 200 से अधिक सक्रिय लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर मौजूद हैं।
LTSI के प्रेसिडेंट-इलेक्ट डॉ. अभिदीप चौधरी ने कहा,
"भारत का लिवर ट्रांसप्लांट इकोसिस्टम विज्ञान, नैतिकता और मानवीय मूल्यों का बेहतरीन संतुलन है। हर सफल ट्रांसप्लांट कठोर प्रोटोकॉल, पारदर्शी डोनर मूल्यांकन और मल्टी-डिसिप्लिनरी टीमों की प्रतिबद्धता का परिणाम है।"
विशेषज्ञों ने बताया कि भारत दुनिया में सबसे अधिक लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट करता है और सफलता व सुरक्षा के मामले में वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है। प्रत्येक ट्रांसप्लांट कठोर, पारदर्शी और कानूनी निगरानी के तहत किया जाता है, जिसमें डोनर और रिसिपिएंट दोनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।
डोनर आमतौर पर करीबी रिश्तेदार होते हैं, और प्रत्येक केस मेडिकल, साइकोलॉजिकल और एथिकल जांच से गुजरने के बाद ही मंजूर होता है। यही प्रक्रिया भारत को विश्व के सबसे सफल ट्रांसप्लांट देशों में शामिल करती है।
ILDLT के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद रेला ने कहा,
"भारत का LDLT मॉडल दुनिया के लिए ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ बन चुका है। यहां उत्कृष्ट सर्जिकल कौशल के साथ ऐसा नैतिक और कानूनी ढांचा है, जो डोनर और रिसिपिएंट दोनों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।"
LTSICON 2025 वैज्ञानिक सहयोग और विचारों के आदान-प्रदान का प्रमुख मंच है। इस साल सम्मेलन में 20 से अधिक देशों के हजार से ज्यादा विशेषज्ञ, हेपेटोलॉजिस्ट और शोधकर्ता शामिल हुए।
