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मिर्गी मरीजों को बड़ी राहत: एम्स में शुरू हुई मुफ्त थेराप्यूटिक ड्रग मॉनिटरिंग जांच

Date : 07-Jan-2026

 एम्स में आने वाले मिर्गी के मरीजों को लेकर राहत भरी खबर है। अब उन मरीजों को थेरेप्यूटिक ड्रग मॉनिटरिंग जांच के लिए बाहर नहीं भागना पड़ेगा और उन्हें यह सुविधा बिलकुल मुफ्त मिलेगी। एम्स प्रशासन ने इस निशुल्क सुविधा को शुरू करने का फैसला किया है ताकि मिर्गी के मरीज अपने दवाओं के स्तर की जांच अस्पताल में ही करवा सकें और उन्हें कोई अतिरिक्त खर्च न करना पड़े।

एम्स ने मिर्गी की प्रमुख दवाओं की जांच हेतु मरीजों के ब्लड सैंपल नामित प्रयोगशालाओं में भेजने के निर्देश दिए हैं

एम्स ने सभी विभागों और केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि मरीजों के ब्लड सैंपल को नामित प्रयोगशालाओं में भेजा जाए। इसके तहत मिर्गी में इस्तेमाल होने वाली दवाओं फेनोबार्बिटल, कार्बामाजेपाइन, वैल्प्रोइक एसिड और फिनाइटोइन की जांच की जाएगी।

थेरेप्यूटिक ड्रग मॉनिटरिंग में ब्लड दवा स्तर मापा जाता है, सही खुराक, विषाक्तता और मिर्गी उपचार प्रभावशीलता सुनिश्चित होती है

थेरेप्यूटिक ड्रग मॉनिटरिंग जांच का मतलब है कि ब्लड में दवाओं की मात्रा मापी जाती है। इससे यह पता चलता है कि मरीज को दवा की सही मात्रा मिल रही है या नहीं। अगर खुराक सही नहीं है तो डॉक्टर उसे सुधार सकते हैं। साथ ही यह भी देखा जाता है कि दवा से कोई विषाक्तता तो नहीं हो रही। मिर्गी के मरीजों को कई दवाएं दी जाती हैं और इनमें से कुछ दवाओं के सही स्तर की निगरानी बेहद जरूरी होती है।

एम्स में ओपीडी और भर्ती मरीजों हेतु मुफ्त जांच उपलब्ध, दिल्ली ओपीडी कलेक्शन सेंटर व झज्जर एनसीआई में सुविधा

एम्स ने कहा है कि इस जांच की सुविधा ओपीडी और अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों दोनों के लिए उपलब्ध होगी। दिल्ली में ओपीडी मरीज कलेक्शन सेंटर, रूम नंबर 3 में सुबह साढ़े आठ बजे से दोपहर एक बजे तक जांच करवा सकते हैं। वहीं, झज्जर स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान/एम्स में भी यह सुविधा मिलेगी।

एम्स की पहल से मिर्गी मरीजों को बाहर जांच नहीं करानी होगी, अब निशुल्क टीडीएम से समय और खर्च बचेगा

इस पहल से मरीजों को पहले की तरह बाहर जाकर जांच करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब तक मिर्गी के मरीजों को अलग-अलग दवाओं की थेराप्यूटिक ड्रग मॉनिटरिंग जांच के लिए लगभग 390 से लेकर 1880 रुपए तक खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब एम्स में यह सुविधा निशुल्क उपलब्ध होगी, जिससे मरीजों का आर्थिक और समय दोनों का बोझ कम होगा।


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