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(अपडेट) बांग्लादेश चुनाव में बीएनपी की बढ़त बरकरार, दो-तिहाई बहुमत का दावा; चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान पर जताया आभार

Date : 13-Feb-2026

 ढाका, 12 फरवरी। बांग्लादेश के 13वें नेशनल पार्लियामेंट चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाले गठबंधन को शुरुआती नतीजों में मजबूत बढ़त मिलती दिख रही है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार घोषित 129 सीटों में से बीएनपी गठबंधन 96 सीटें जीत चुका है, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 32 सीटें मिली हैं। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा है। अंतिम और आधिकारिक परिणामों की घोषणा अभी बाकी है।

बीएनपी सेंट्रल इलेक्शन स्टीयरिंग कमेटी के प्रवक्ता महदी अमीन ने दावा किया है कि पार्टी दो-तिहाई से अधिक सीटें हासिल कर सरकार बनाएगी। गुरुवार रात ढाका के गुलशन स्थित पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि अब तक की मतगणना और सीटवार रुझान पार्टी के पक्ष में हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बीएनपी चेयरमैन तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगरा-6 सीटों से अनौपचारिक जीत दर्ज की है।

तारिक रहमान, जो पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं, पार्टी के प्रमुख चेहरे माने जाते हैं और उन्हें प्रधानमंत्री पद का दावेदार भी माना जा रहा है। उनके अलावा जेनेदाह-1 (शैलकुपा) सीट से BNP उम्मीदवार और पूर्व अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां ने भी अनौपचारिक रूप से जीत हासिल की है। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक उन्हें करीब 1.73 लाख वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी जमात उम्मीदवार को लगभग 57 हजार वोट प्राप्त हुए।

इस बीच बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एएमएम नासिर उद्दीन ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए जनता का आभार जताया है। उन्होंने 13वें संसदीय चुनाव को “बहुत अच्छे और स्वीकार्य” बताया। अनौपचारिक नतीजों की घोषणा के दौरान उन्होंने कहा कि 18 करोड़ की आबादी वाले देश में कुछ त्रुटियां संभव हैं, लेकिन मतदाताओं, राजनीतिक दलों और नेताओं का सहयोग सराहनीय रहा।

हालांकि, अवामी लीग ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेता एएफएम बहाउद्दीन नसीम ने चुनाव को “एकतरफा” बताते हुए निष्पक्षता पर चिंता जताई और आरोप लगाया कि बड़ी आबादी को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा गया। उन्होंने अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम बताया।

इन सबके बीच बांग्लादेश की राजनीति के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे देश की सत्ता का संतुलन और भविष्य की नीतियों की दिशा तय होगी। अब सभी की नजरें चुनाव आयोग द्वारा जारी किए जाने वाले अंतिम परिणामों पर टिकी हैं।


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