नेपाल में मध्यमा मिथिला परिक्रमा का शुभारंभ | The Voice TV

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नेपाल में मध्यमा मिथिला परिक्रमा का शुभारंभ

Date : 17-Feb-2026

 काठमांडू, 17 फरवरी। नेपाल में धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व की मध्यमा मिथिला परिक्रमा सोमवार से शुरू हुई। मधेश प्रदेश के मुख्यमंत्री कृष्णप्रसाद यादव ने धनुषा जिले के कचुरी स्थित मिथिला बिहारी मठ से भगवान राम-जानकी की पालकी को उठाकर परिक्रमा का शुभारंभ किया।यह यात्रा अगले दिन यानी मंगलवार को जनकपुरधाम पहुंची, जहां इसका स्वागत करने के लिए मुख्यमंत्री यादव पहले से ही मौजूद रहे। इस अवसर पर भगवान राम–जानकी की पालकी को जनकपुरधाम स्थित रत्नसागर मठ होते हुए जानकी मंदिर लाया गया। वहां से जनकपुर के विभिन्न मठ–मंदिरों की पालकियों को शामिल कर सामूहिक रूप से परिक्रमा शुरू की गयी। पालकी के पीछे पारंपरिक बाजा–गाजा और मौलिक मिथिला परिधान में सजे श्रद्धालु शामिल हुए।15 दिनों तक चलने वाली 120 किलोमीटर लंबी यह परिक्रमा हर वर्ष फाल्गुन कृष्ण अमावस्या से पूर्णिमा तक आयोजित होती है, जो 90 किलोमीटर नेपाल में और 30 किलोमीटर भारत में होकर गुजरती है। नेपाल–भारत के बीच सांस्कृतिक सेतु के रूप में पहचानी जाने वाली यह परिक्रमा धनुषा, महोत्तरी तथा भारत के बिहार के दर्जनों धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों से होकर गुजरती है।मिथिला माहात्म्य के अनुसार मध्यमा मिथिला परिक्रमा की शुरुआत 18वीं शताब्दी से कुछ पहले हुई मानी जाती है। विष्णु पुराण के अंतर्गत वर्णित मिथिला माहात्म्य में मिथिला की तीन प्रकार की परिक्रमाओं का उल्लेख है। ‘बृहत् मिथिला परिक्रमा’ बहुत कम संत–महात्मा ही करते हैं। यह परिक्रमा बिहार की राजधानी पटना के निकट गंगा नदी के तट से शुरू होकर नेपाल के धौलागिरी पर्वत, हिमालय की गोद और कोशी नदी होते हुए पुनः गंगा तक के क्षेत्र तक जाती है। इसी तरह कल्याणेश्वर से शुरू होकर वहीं समाप्त होने वाली परिक्रमा को ‘मध्यमा परिक्रमा’ कहा जाता है। जनकपुरनगर के आसपास की जाने वाली परिक्रमा को ‘लघु’ अथवा ‘अंतरगृह परिक्रमा’ कहा जाता है। प्रत्येक विश्राम स्थल पर मिथिला माहात्म्य की कथा-वाचन की परंपरा है। परिक्रमा के अंतर्गत कुल 15 पड़ाव होते हैं, जिनमें चार भारत में और शेष नेपाल में स्थित हैं। परिक्रमावासी क्रमशः जनकपुर के हनुमाननगर, भारत के कलना स्थित कल्याणेश्वर, फूलहर का गिरिजास्थान, महोत्तरी का मठिहानी, जलेश्वर, मडैई, धुव्रकुंड, कंचनवन, पर्वता, धनुषाधाम, सतोखर, औरही होते हुए पुनः भारत के करुणा और विसौल तक पदयात्रा करेंगे। 15वें दिन जनकपुर की अंतरगृह परिक्रमा कर मध्य परिक्रमा संपन्न होगी। परिक्रमा के समापन के अगले दिन मिथिला क्षेत्र में होली पर्व मनाने की परंपरा है।जनकपुरधाम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री यादव ने रामायण सर्किट को विशेष प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहरायी। उन्होंने बताया कि अयोध्या को सीधे जनकपुरधाम से जोड़ने के लिए जनकपुरधाम हवाई अड्डे के विस्तार की योजना आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा, “अयोध्या से प्रतिदिन लगभग 500 यात्रियों के सीधे जनकपुरधाम आने के लिए सीधी फ्लाइट संचालन की तैयारी शुरू करेंगे।”


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