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बिहार में भागलपुर के शहरी क्षेत्र में बाढ़ कहर, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति भयावह

Date : 08-Aug-2025

भागलपुर, 08 अगस्त। जिले में बाढ़ की स्थिति दिन ब दिन भयावह होती जा रही है। बाढ़ का असर अब शहरी इलाकों में भी साफ दिखने लगा है। शहर के वीआईपी इलाकों में गिने जाने वाले बैंक कॉलोनी स्थित घर गंगा के पानी से घिर चुके हैं।

पानी भरने से घरों के फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और जरूरी सामान भीगकर खराब हो रहे हैं। सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। लेकिन फिलहाल नाव की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जिससे लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है। बढ़ते जलस्तर के बीच राहत और बचाव कार्य में भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। उधर सबौर प्रखंड में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से स्थिति गंभीर हो गई है। जलस्तर वृद्धि के कारण कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। जिससे लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इंग्लिश फरका, घोसपुर समेत कई क्षेत्रों में बाढ़ का पानी घरों और खेतों में घुस गया है।

एन एच -80 पर भी खतरा मंडरा रहा है। बताया जा रहा है कि बीते रात में एक स्थान पर बाढ़ का पानी सड़क पर चढ़ गया था, जिसे मिट्टी डालकर अस्थायी रूप से रोका गया है। गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के चलते यह खतरा बना हुआ है कि किसी भी समय सड़क पर पानी बह सकता है। यदि ऐसा हुआ तो भागलपुर का संपर्क कई इलाकों से कट सकता है। प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस राहत या बचाव व्यवस्था नहीं की गई है।

इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। मजबूरी में स्थानीय लोगों ने खुद एक छोटी नाव की व्यवस्था की है, जिससे वे अपने घरों से बाहर निकलकर मुख्य सड़क तक पहुंच पा रहे हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पहले भी बाढ़ आई थी, लेकिन इस बार जलस्तर की रफ्तार तेज है और हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। लोग आशंकित हैं कि अगर जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो फसल, घर और बुनियादी ढांचा सब बर्बाद हो सकता है। फिलहाल, लोग अपनी सुरक्षा के लिए ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। उदर ममलखा में गंगा बांध टूटने से यहाँ कटाव काफ़ी तेजी से हो रहा है। यहां गंगा रोजाना सैकड़ो मीटर जमीन को निगल रही है। अगर कटाव निरोधी कार्य मे तेजी नही लाइ गई तो गाँव को बचाना मुश्किल हो जाएगा।

गंगा का पानी ममलखा गांव मे घुस गया है। स्कूल समेत सैकड़ो घर जलमग्न हो गए हैं। स्कूल के अंदर आठ से दस फिट पानी है। तेजी से कटाव के कारण ग्रामीण दहशत में है। जल संसाधन विभाग द्वारा कटावनिरोधी कार्य धीमी गति से चलाया जा रहा है। गांव के लोग विभाग का सहयोग कर रहे हैं। परंतु गंगा के विकराल रूप के कारण गांव के अस्तित्व पर अब खतरा बना हुआ है। उधर बाढ़ प्रभावितों के शरण स्थल पर जिला प्रशासन ने सुविधाएं देनी शुरू कर दी है।

यहां बीती रात ही जेनरेटर से बिजली सुविधा मुहैया कराई गई थी। अब यहां पीएचईडी द्वारा शौचालय और पानी की टोटी लगाई जा रही है। इसके अलावा नगर निगम द्वारा सफाई भी कराई जा रही है। बाढ़ प्रभावितों के ठहरने और मवेशियों के स्थल पर चूना-ब्लीचिंग आदि का छिड़काव किया जा रहा है। एडीएम (आपदा प्रबंधन) कुंदन कुमार ने बताया कि पशुओं की सूची बन रही है। ताकि रजिस्ट्रेशन के हिसाब से इन लोगों को चारा, आहार आदि मिल सके। शहर की मुख्य सड़कों पर जगह-जगह मवेशियों की कतार नजर आ रही है। बाढ़ से विस्थापित हुए पशुपालक अपने दर्जनों मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थान पर पलायन कर रहे हैं। आज सुबह से ही यह दृश्य शहर के तिलकामांझी, आदमपुर, नयाबाजार व विश्वविद्यालय क्षेत्र की सड़कों पर दिख रहा है। इससे सड़क पर जगह-जगह जाम लग रहा है। यातायात में आ रही बाधा से वाहन चालकों को काफी परेशानी हो रही है।


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