पटना, 08 अगस्त। बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के तत्वाधान में 'भारत में मानव दुर्व्यापार: समन्वय और रोकथाम तंत्र को मजबूत करना' विषय पर राज्यस्तरीय परामर्श बैठक में बच्चों की तस्करी एवं अन्य बाल अपराधों से निपटने के लिए बेहतर समन्वय, जवाबदेही और रोकथाम रणनीतियों की तात्कालिक आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया।
यह परामर्श बैठक 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन' की ओर से बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित की गयी। बाल अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए 250 से भी ज्यादा नागरिक संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) 418 जिलों में काम कर कर रहा है।
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य हुलेश मांझी ने बच्चों के विरुद्ध अपराधों से निपटने में सामुदायिक भागीदारी के महत्व पर बल देते हुए कहा कि हम सभी को एक समाज के रूप में बच्चों के खिलाफ हो रहे किसी भी प्रकार के अत्याचार की सूचना देनी चाहिए। बहुत से कमजोर और असुरक्षित बच्चे हमारे सामने शोषण का शिकार होते हैं, लेकिन हम इसे अनदेखा कर देते हैं।
बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव शिल्पी सोनिराज ने परामर्श बैठक में कहा कि हमें मानव तस्करी के मामलों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ देखने की आवश्यकता है। समय की मांग केवल न्याय ही नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण पुनर्वास भी है, ताकि जिन बच्चों के साथ अन्याय हुआ है, उन्हें न्याय के साथ-साथ वह देखभाल और गरिमा मिल सके, जिसके वे वास्तव में हकदार हैं।
बिहार पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) डॉ. अमित कुमार जैन ने इस मौके पर कहा कि मानव तस्करी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। हम अभी भी सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने से बहुत पीछे हैं।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने भारत में मानव तस्करी की रोकथाम के लिए कानूनी ढांचे की सराहना करते हुए कहा कि भारत सरकार ने देश में मानव तस्करी विरोधी कानूनों को सुदृढ़ किया है और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस)) के तहत कई महत्वपूर्ण प्रावधान और प्रक्रियाएं जोड़ी हैं। अब आवश्यकता इन कानूनों का प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन की है, जिसके लिए सभी स्तरों पर सभी पक्षों की समन्वित कार्रवाई जरूरी है।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने भारत में मानव दुर्व्यापार से जुड़े मौजूदा कानूनी और नीतिगत ढांचे की समीक्षा की और आह्वान किया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों, न्यायपालिका, सरकारी विभागों और सिविल सोसाइटी के बीच ठोस समन्वय स्थापित हो, ताकि कानून पर अमल, पीड़ितों की मदद और विभिन्न एजेंसियों के बीच सहयोग में आने वाली चुनौतियों से पार पाया जा सके। उन्होंने बच्चों की तस्करी के उन्मूलन की दिशा में समयबद्ध कार्ययोजना बनाए जाने की भी सिफारिश की।
उल्लेखनीय है कि जेआरसी ने अपने सहयोगी संगठनों की मदद से देशभर में 1 अप्रैल 2024 से 30 अप्रैल 2025 के बीच 56,242 बच्चों को तस्कर गिरोहों के चंगुल से मुक्त कराया और तस्करों के खिलाफ 38,353 से अधिक मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की।
उल्लेखनीय है कि बिहार में जेआरसी के 35 सहयोगी संगठन राज्य के सभी 38 जिलों में सक्रिय हैं। इन संगठनों ने 2023 से अब तक 4991 बच्चों को बाल श्रम और तस्कर गिरोहों के चंगुल से मुक्त कराया और 21,485 बाल विवाह रोके और रुकवाए। साथ ही, 6510 मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
