नई दिल्ली, 08 अगस्त। उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 के तहत राजद्रोह के प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है।
मेजर जनरल वोम्बटकेरे ने दायर याचिका में कहा है कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ए) के तहत मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है, क्योंकि भारतीय न्याय संहिता में औपनिवेशिक राजद्रोह कानून को एक नए नाम से पेश किया गया है। याचिका में कहा गया है कि भले ही इस प्रावधान की भाषा बदल दी गई है, लेकिन इसके मूल बिंदु वही रहे या और भी व्यापक हो गए।
उच्चतम न्यायालय ने 12 सितंबर, 2023 को राजद्रोह कानून के मामले को संविधान बेंच के रेफर किया था। संविधान बेंच 1962 के केदारनाथ फैसले की समीक्षा करेगी। केदारनाथ के फैसले में भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए को वैध ठहराया गया था। इसके पहले 11 मई, 2022 को उच्चतम न्यायालय ने राजद्रोह के तहत नए केस दर्ज करने पर रोक लगा दी थी। न्यायालय ने कहा था कि अगर किसी पर केस दर्ज हो, तो निचली अदालत से राहत की मांग करे। न्यायालय ने लंबित मामलों में कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया था। न्यायालय ने कहा था कि जेल में बंद लोग निचली अदालत में जमानत याचिका दाखिल करें।
