आज पूरे भारत में विश्व हाथी दिवस मनाया जा रहा है, जिसके तहत कोयंबटूर में एक प्रमुख समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भाग लिया और एक विशेष कार्यशाला का उद्घाटन किया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने हाथियों के आवास प्रबंधन, गलियारों के संरक्षण, मानव-पशु संघर्ष और क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया।
भारत में विश्व की लगभग 60 प्रतिशत जंगली हाथी आबादी निवास करती है। देश में 33 हाथी अभयारण्य और 150 से अधिक चिन्हित हाथी गलियारे हैं, जो उत्तर-पूर्व, दक्षिण और पूर्वी राज्यों में फैले हुए हैं।
सरकार द्वारा क्रियान्वित प्रोजेक्ट एलीफेंट एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य हाथियों और उनके पर्यावास की रक्षा करना, मानव-पशु संघर्ष को कम करना और बंदी हाथियों की भलाई सुनिश्चित करना है।
हाथियों के संरक्षण को और सशक्त बनाने के लिए "गज सूचना" ऐप के माध्यम से एक आनुवंशिक डेटाबेस भी तैयार किया गया है, जिसमें भारत भर के 300 बंदी हाथियों का डीएनए डेटा संग्रहित है।
तमिलनाडु जैसे राज्य हाथियों की सुरक्षा के लिए कई आधुनिक उपाय अपना रहे हैं, जिनमें रेलवे पटरियों पर AI कैमरों का उपयोग शामिल है ताकि टकराव से बचा जा सके। राज्य में 5000 से अधिक स्कूलों के करीब 12 लाख छात्र आज जागरूकता कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर हाथी संरक्षण का संदेश फैला रहे हैं।
इस विश्व हाथी दिवस पर यह संदेश दिया गया कि हाथियों का संरक्षण सिर्फ वन्यजीव ही नहीं, बल्कि मानवता की भी जिम्मेदारी है, और इसके लिए सरकार, समाज और तकनीक को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।
