अगर स्वदेशी चुप रहे तो 20 साल में बनेगा ‘अज्ञात’ समुदाय का मुख्यमंत्री : डॉ. हिमंत | The Voice TV

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अगर स्वदेशी चुप रहे तो 20 साल में बनेगा ‘अज्ञात’ समुदाय का मुख्यमंत्री : डॉ. हिमंत

Date : 15-Aug-2025

गुवाहाटी, 15 अगस्त । स्वतंत्रता दिवस पर गुवाहाटी में तिरंगा फहराने के बाद असम के मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा ने चेतावनी दी कि यदि असमिया समाज ने समय रहते कदम नहीं उठाया, तो आने वाले 20 वर्षों में राज्य का मुख्यमंत्री “अज्ञात लोगों” में से होगा।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने बार-बार “अज्ञात लोग” शब्द का प्रयोग किया। हालांकि किसी समुदाय का नाम नहीं लिया। उनका इशारा बंगाली भाषी मुसलमानों की ओर माना गया। बाद में एक्स पर उन्होंने लिखा कि यदि सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो “मुख्यमंत्री भी घुसपैठियों के समुदाय से होगा।”

मुख्यमंत्री ने स्वदेशी लोगों से भूमि, पहचान और संस्कृति की रक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि अब तक 1.2 लाख बीघा अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराया जा चुका है और यह अभियान “भूमि जिहाद” के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निचले और मध्य असम की जनसांख्यिकी बदल चुकी है और अब ऊपरी व उत्तर असम को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने चेताया- “10 साल में हम अपनी जाति, माटी, भेटी (निवास) खो देंगे, 15 साल में 80 प्रतिशत मंत्री उन्हीं के होंगे और 20 साल में मुख्यमंत्री भी अज्ञात समुदाय से होगा।”

मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने आग्रह किया कि कोई भी स्वदेशी व्यक्ति अपनी भूमि या संपत्ति “अज्ञात” लोगों को न बेचे। उनके अनुसार आर्थिक आत्मनिर्भरता ही जनसांख्यिकीय चुनौती को रोक सकती है। उन्होंने पिछले दौर की “समझौतापूर्ण” नीतियों को संकट का कारण बताते हुए कहा कि पूर्वजों ने बाहरी लोगों को घरों में बसने दिया और “लव जिहाद” जैसे सांस्कृतिक अतिक्रमण को बढ़ावा दिया।

उन्होंने चेताया कि यदि वर्तमान रुझान जारी रहे तो बटद्रवा की तरह अन्य सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों पर भी “अतिक्रमण” होगा। शिक्षा, कानून और परिवहन जैसे क्षेत्रों में भी “अज्ञात लोगों” का वर्चस्व बढ़ने की बात उन्होंने कही।

मुख्यमंत्री ने जिला उपायुक्तों को निर्देश दिया कि सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण न होने दें, अन्यथा सख्त कार्रवाई की जाएगी। अपने संबोधन में उन्होंने असमिया सांस्कृतिक संस्थाओं की रक्षा के लिए टिके रहने वालों की सराहना करते हुए कहा- “हम अस्तित्व के लिए लड़ेंगे।हथियार से नहीं बल्कि आत्मसंकल्प से। चुप्पी से असमिया समाज का अंत होगा।”


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