प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से अपने संबोधन में अवैध आव्रजन को भारत की जनसांख्यिकीय संरचना और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि देश में एक सोची-समझी साजिश के तहत जनसांख्यिकी को बदला जा रहा है, जिससे एक नया संकट जन्म ले रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अवैध प्रवासियों के कारण:
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देश के युवाओं की आजीविका प्रभावित हो रही है,
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हमारी बहनों और बेटियों की सुरक्षा खतरे में है,
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और आदिवासी समुदायों को गुमराह कर उनकी भूमियों पर अतिक्रमण किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उच्च-स्तरीय जनसांख्यिकी मिशन की घोषणा
इन खतरों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने एक "उच्च-स्तरीय जनसांख्यिकी मिशन" की घोषणा की, जिसका उद्देश्य देश की जनसंख्या संरचना पर पड़ रहे बाहरी प्रभावों की निगरानी और नियंत्रण करना होगा।
प्रधानमंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर विशेष चिंता जताते हुए कहा कि ये बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं।
उन्होंने देशवासियों से सतर्क रहने का आग्रह करते हुए कहा कि घुसपैठियों और उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी, और देशहित में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
यह बयान अवैध आव्रजन से जुड़ी चिंताओं को स्पष्ट रूप से नीतिगत प्राथमिकता की श्रेणी में लाता है और सरकार की सुरक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण को उजागर करता है।
