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धर्मेन्द्र प्रधान ने लोकसभा में भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक पेश किया

Date : 18-Aug-2025

नई दिल्ली, 18 अगस्त। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को लोकसभा में भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया। इसका उद्देश्य भारतीय प्रबंध संस्थान अधिनियम, 2017 में संशोधन कर भारतीय प्रबंध संस्थान, गुवाहाटी (आईआईएम गुवाहाटी) को अधिनियम की अनुसूची में शामिल करना है।

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि केंद्र सरकार, असम सरकार और यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के प्रतिनिधियों के बीच राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओएस) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके तहत केंद्र सरकार विशेष विकास पैकेज (एसडीपी) के अंतर्गत कई परियोजनाएं लागू करेगी, जिनमें गुवाहाटी में एक आईआईएम की स्थापना भी शामिल है।

वर्तमान में देश में 21 आईआईएम हैं, जिन्हें राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित किया गया है और वे सभी आईआईएम अधिनियम की अनुसूची में सूचीबद्ध हैं। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, आईआईएम गुवाहाटी को भी इस अनुसूची में शामिल किया जाएगा, जिससे यह देश का 22वां आईआईएम बन जाएगा। विधेयक में कहा गया है कि असम सरकार ने राज्य की भौगोलिक स्थिति और समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए राज्य में एक आईआईएम की स्थापना का अनुरोध किया था।

विधेयक में कहा गया है कि असम एकमात्र ऐसे राज्यों में शामिल है, जिसकी जनसंख्या तीन करोड़ से अधिक है, फिर भी वहां अभी तक कोई आईआईएम नहीं है। अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण के अनुसार, असम में उच्च शिक्षा संस्थानों में 5.5 लाख से अधिक विद्यार्थी नामांकित हैं। ऐसे में एक आईआईएम की स्थापना से न केवल पूर्वोत्तर क्षेत्र में शिक्षा का स्तर ऊंचा होगा, बल्कि वहां के युवाओं को प्रबंधकीय कौशल विकसित करने का भी अवसर मिलेगा।

विधेयक के मुख्य बिंदु-

अनुभाग 4 में संशोधन कर यह प्रावधान किया गया है कि प्रत्येक आईआईएम को एक स्वतंत्र निकाय के रूप में मान्यता दी जाएगी। आईआईएम गुवाहाटी पर अधिनियम की सभी धाराएं लागू होंगी। आईआईएम गुवाहाटी के पहले निदेशक मंडल के गठन तक इसके सभी अधिकार और कार्य केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति या व्यक्तियों के माध्यम से संचालित होंगे। अधिनियम की अनुसूची में आईआईएम गुवाहाटी को जोड़ने का प्रस्ताव है।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने 1961 में पहला आईआईएम कोलकाता और दूसरा अहमदाबाद में स्थापित किया था। इसके बाद क्रमश: बेंगलुरू, लखनऊ, इंदौर, कोझिकोड और कई अन्य स्थानों पर आईआईएम की स्थापना हुई। 2017 में पारित कानून के माध्यम से इन संस्थानों को डिग्री प्रदान करने का अधिकार और शैक्षणिक स्वायत्तता दी गई थी।


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