जगदलपुर, 17 सितंबर। नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की ओर से जारी पत्र में पहली बार हथियार छोड़कर शांति वार्ता की बात कही गई है। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने नक्सलियों के इस शांति वार्ता के प्रस्ताव को संदिग्ध बताया है। उनका कहना है कि माओवादी प्रवक्ता 'अभय' के पत्र की शैली, फोटो और ईमेल आईडी की सत्यता पर संदेह है, इसलिए सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर कोई रोक नहीं लगेगी। उन्हाेंने कहा कि सरकार का स्पष्ट रुख है कि नक्सलियों के लिए मुख्यधारा में लौटने का एक मात्र रास्ता आत्मसमर्पण ही है, न कि कोई शर्त आधारित बातचीत। उन्होंने कहा कि बंदूक थामने वाले हाथों को अब कारोबार संभालना चाहिए।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि यह पत्र एक माह पहले 15 अगस्त को जारी किया गया है। यदि नक्सलियों का उद्देश्य संघर्ष विराम ही था, तो हाल ही में शिक्षादूतों और ग्रामीणों की हत्याएं व आइईडी विस्फोट क्यों हुए? साथ ही गृहमंत्री ने कहा कि जहां तक वीडियो कॉल से चर्चा की बात है, यह प्रस्ताव हम पहले ही दे चुके हैं, पर आज तक नक्सली संगठन की ओर से कोई पहल नहीं हुई। यदि कोई नक्सली या नक्सलियों का समूह वार्ता या समर्पण कर मुख्यधारा में जुड़ना चाहता है, तो इसके लिए हमारे पास बेहतर पुनर्वास नीति बनी हुई है।
गृहमंत्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने देश में सबसे अच्छी पुनर्वास नीति तैयार की है, जिससे आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को न सिर्फ आवास और रोजगार बल्कि उद्यमी बनने तक का अवसर मिले। हाल ही में जगदलपुर में हुए ’बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट’ कार्यक्रम के जरिए आत्मसमर्पित नक्सलियों को व्यापार की राह पर लाने की पहल की गई है। सरकार ने अतिरिक्त सब्सिडी का प्रावधान किया है, जिससे आत्मसमर्पित नक्सली उद्यम शुरू करें तो लाभ मिलेगा, बल्कि ऐसे उद्यमी भी प्रोत्साहन पाएंगे जो उन्हें रोजगार देंगे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प से मार्च 2026 तक नक्सलियों के समूल सफाए को लेकर प्रदेश में चल रहे अभियान से नक्सली संगठन दबाव में हैं। केवल छत्तीसगढ़ में ही बसव राजू समेत चार केंद्रीय समिति सदस्य और 463 से अधिक नक्सली मारे गए हैं, जबकि 1500 से अधिक आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
