प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जनसेवा और सुशासन के मूल मंत्र पर कार्य करते हुए निरंतर बदलाव और प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर रही है। सेवा पर्व श्रृंखला के तहत आज महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार द्वारा किए गए प्रयासों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
पिछले 11 वर्षों में भारत सरकार ने महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और कानूनी रूप से सशक्त बनाने के लिए जीवन-चक्र आधारित नीतियों का एक मजबूत ढांचा तैयार किया है। "नारी शक्ति" अब एक राष्ट्रीय मिशन का रूप ले चुकी है, जो हर वर्ग की महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के साथ जीने का अवसर प्रदान कर रही है।
प्रमुख पहलें:
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कानूनी संरक्षण और योजनाएँ: महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों के साथ-साथ हिंसा और भेदभाव के खिलाफ सख्त कानून लागू किए गए हैं।
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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ: इस योजना ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। लिंगानुपात में सुधार देखा गया है — 918 (2014-15) से बढ़कर 930 (2023-24) हो गया है।
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सुकन्या समृद्धि योजना (SSY): जनवरी 2015 में शुरू हुई यह योजना लाखों लड़कियों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनी है।
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लखपति दीदी पहल: इसका उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को कम से कम ₹1 लाख सालाना आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। उदाहरणस्वरूप, जम्मू-कश्मीर की शबनम कादिर ने बताया कि किस तरह एक SHG से जुड़कर उन्होंने अपनी जिंदगी बदली।
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बीमा सखी योजना: यह पहल भी वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रभावी कदम है।
हर क्षेत्र में नेतृत्व की ओर
चाहे बात जमीनी स्तर के शासन, रक्षा बलों, या विमानन जैसे क्षेत्रों की हो—महिलाएं अब सिर्फ विकास का हिस्सा नहीं, बल्कि विकास की अगुआ बन रही हैं।
इन प्रयासों से स्पष्ट होता है कि मोदी सरकार महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं के नेतृत्व वाले भारत की दिशा में कार्य कर रही है—जहाँ नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है।
