उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने जीएसटी दर में हाल ही हुए संशोधन को ध्यान में रखते हुए एक नई एडवाइजरी जारी की है, जो सोमवार से प्रभावी हो गई है। इस एडवाइजरी के तहत, निर्माता, पैकर्स और आयातक अब 22 सितंबर से पहले निर्मित और अभी तक बिना बिके पैकेजों पर स्वेच्छा से अतिरिक्त संशोधित मूल्य वाले स्टिकर लगा सकते हैं, बशर्ते पैकेज पर छपी मूल एमआरपी स्पष्ट और अस्पष्ट न हो।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह स्टिकर लगाना अनिवार्य नहीं है, बल्कि उन कंपनियों के लिए वैकल्पिक है जो संशोधित कीमतें घोषित करना चाहती हैं। इसके अलावा, जीएसटी संशोधन से पहले छपी पुरानी पैकेजिंग सामग्री या रैपर का उपयोग मार्च 2026 तक या स्टॉक समाप्त होने तक करने की अनुमति भी दी गई है। कंपनियां पैकेज पर किसी उपयुक्त स्थान पर मुहर, स्टिकर या ऑनलाइन प्रिंट के माध्यम से एमआरपी को सही कर सकती हैं।
सरकार ने निर्माताओं, पैकर्स और आयातकों को यह भी निर्देश दिया है कि वे डीलरों, खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को संशोधित जीएसटी दरों की जानकारी देने के लिए सक्रिय प्रयास करें। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और सोशल मीडिया सहित सभी संचार माध्यमों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, यह कदम व्यापार सुगमता और उपभोक्ता संरक्षण के बीच संतुलन बनाता है, ताकि उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम हो और उपभोक्ताओं को जीएसटी में होने वाली कटौती का लाभ समय पर मिल सके।
