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तीन दशकों से असम को प्राणवान करने वाले काल के गाल में समा गये जुबीन

Date : 19-Sep-2025

गुवाहाटी, 19 सितंबर । असम के लाखों लोगों के दिलों पर राज करने वाले जुबीन गर्ग आज हमारे बीच नहीं हैं। उनके निधन से लोग दुखी हैं।इस खबर पर राज्य के लोग किसी तरह से भी विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन जुबीन के चिकित्सक ने इस खबर की सत्यता की पुष्टि की, जिसके बाद पूरे असम में शोक की लहर दौड़ गई।

लोगों को अपने मोबाइल पर जुबिन के निधन की खबर के आने के बाद भी कोई दूसरे को इसे शेयर नहीं कर पा रहा था। लोग इसे झूठा कहकर खारिज करते रहे। लेकिन यह खबर सच है, वास्तव में हर असमिया, असमवासी संगीत प्रेमी के दिल में आज अचानक एक संगीत का सितारा जैसे आकाश में खो गया।

जानकारी के अनुसार, लोगों के दिलों पर राज करने वाले जुबीन गर्ग सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल में भाग लेने पहुंचे थे। इस बीच उन्होंने सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग के लिए गए थे। स्कूबा डाइविंग के दौरान ही वह समुद्र की सतह पर गिर गए। नतीजतन, वह बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया और तुरंत आईसीयू में भेजा गया, हालांकि डॉक्टरों की अनवरत कोशिशों के बाद भी उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। लाखों प्रशंसकों को शोक की लहर में डुबोकर असमवासियों को छोड़कर जुबीन गर्ग ने इस दुनिया से विदाई मांग ली। निधन के समय कलाकार की उम्र 52 वर्ष थी।

एक प्रसिद्ध गायक, संगीत निर्देशक, गीतकार और फिल्म अभिनेता जुबिन गर्ग का जन्म 18 नवंबर, 1972 को मेघालय के तुरा में हुआ था। जुबीन गर्ग ने असमिया, हिंदी, बंगाली, बोड़ो, कोच राजवंशी, ग्वालपारीया, चाय बगानिया, हाजोंग, मीसिंग, कार्बी, गारो, राभा, डिमासा, ताई आहोम, नेपाली, भोजपुरी, विष्णुप्रिया मणिपुरी ककबरक, उड़िया, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, अंग्रेजी, गाले, मलयालम, मराठी आदि कई भाषाओं में गीत गाकर उसे अमर बना दिया।

1992 में जुबीन का पहला एल्बम अनामिका रिलीज़ हुआ था। इसके साथ ही जुबीन पेशेवर संगीत की दुनिया में शामिल हो गये। जुबिन ढोल, दोतारा, मेंडोलिन जैसे वाद्ययंत्र बजाने के साथ-साथ एक प्रतिभाशाली कीबोर्ड प्लेयर भी थे। बंगाली फिल्म 'सिर्फ तुम्हारे लिए' के लिए जुबिन ने 2005 में सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार जीता था। हिंदी के 'या अली' गीत के लिए जुबिन ने 2007 में ग्लोबल इंडियन फिल्म अवार्ड (जीआईएफए) और स्टारडस्ट अवार्ड में सर्वश्रेष्ठ गायन (पुरुष) पुरस्कार जीता था। इसके अलावा 'इकोज ऑफ साइलेंस' (अंग्रेजी-खासी) फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक के रूप में राष्ट्रीय पुरस्कार (रजत कमल) प्राप्त किया। आधुनिक असमिया संगीत में नए आयाम प्रदान करने के लिए 2014 में जुबीन गर्ग को रेनैसाँ असम पुरस्कार दिया गया।

असमिया लोगों के दिलों पर राज करने वाले कलाकार जुबीन गर्ग की आकस्मिक मृत्यु ने फिल्म जगत के साथ-साथ उनके प्रशंसकों के बीच गहरा शोक पैदा किया है। सांस्कृतिक जगत ने गहरा शोक व्यक्त किया है और प्रशंसक उन्हें सोशल मीडिया पर लगातार श्रद्धांजलि दे रहे हैं। जुबीन गर्ग की आकस्मिक मृत्यु असम के सांस्कृतिक जगत के लिए एक बड़ा नुकसान है। जुबीन गर्ग ने असम के सांस्कृतिक जगत में एक अनमोल छाप छोड़ी है। उनके गीत, उनकी बुद्धिमत्ता और उनके स्पष्टवादी शैली हमेशा दर्शकों की स्मृति में जीवित रहेंगी। अपने स्पष्टवादिता के चलते कई बार उन्हें आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। राज्य के उग्रवाद को लेकर भी वे अपनी बातें स्पष्ट तरीके से रखते थे।


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