आज से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो गया है। विशेष रूप से महाराष्ट्र में यह उत्सव भक्ति, संस्कृति और परंपरा का संगम बनकर सामने आया है। देश के 51 शक्तिपीठों में से साढ़े तीन शक्तिपीठ महाराष्ट्र में स्थित हैं, जिनमें इन दिनों भक्तिभाव और तैयारियों की छटा देखते ही बनती है।
राज्य के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल हैं:
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तुलजापुर का तुलजा भवानी मंदिर
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कोल्हापुर का महालक्ष्मी मंदिर
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नांदेड़ जिले के माहुर में रेणुका माता मंदिर
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वणी स्थित सप्तश्रृंगी देवी धाम
इन सभी मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया है और भक्तों का सैलाब दर्शन के लिए उमड़ पड़ा है। पुणे के भी प्रसिद्ध मंदिरों — भवानी माता, चतुरश्रृंगी माता, और तांबड़ी जोगेश्वरी — में भी विशेष सजावट और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया है।
इस बार दशहरा नवरात्रि के 11वें दिन मनाया जाएगा, इसलिए यह उत्सव पूरे 11 दिनों तक चलेगा, जिसमें धार्मिक अनुष्ठान, देवी स्तोत्रों का पाठ, पारंपरिक ढोल-ताशे, और "जय माता दी" के गूंजते उद्घोष वातावरण को दिव्य और ऊर्जा से भर देंगे।
शारदीय नवरात्रि का यह पर्व न केवल भक्ति और साधना का प्रतीक है, बल्कि यह सांस्कृतिक वैभव और सामाजिक एकता को भी सशक्त बनाता है। पूरे महाराष्ट्र में मंदिरों और घरों में गरबा, डांडिया, देवी पूजन और व्रतों के माध्यम से यह पर्व एक आध्यात्मिक उत्सव में परिवर्तित हो गया है।
