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बिहार में चुनाव के मद्देनजर भारत-नेपाल सीमा सील,बंगाल से मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने जाने वालों को हुई परेशानी

Date : 11-Nov-2025

अररिया 11 नवम्बर। बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारत-नेपाल सीमा सील कर दी गई है, जिससे मोतियाबिंद की सर्जरी के लिए पश्चिम बंगाल से नेपाल जाने वाले सैकड़ों मरीजों और उनके परिवारों को असुविधा का सामना करना पड़ा। चिकित्सा उपचार के लिए यात्रा की अनुमति प्राप्त करने में असमर्थता के कारण भी उनकी परेशानियां बढ़ गईं।

द्वितीय चरण के तहत मंगलवार को हुए विधानसभा चुनाव के शुरू होने से 72 घंटे पहले भारत-नेपाल मुख्य सीमा को दोनों देशों की ओर से सील कर दिया गया। भारत-नेपाल सीमा के सील होने के कारण न केवल दोनों देशों के स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा, बल्कि बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल के अलग-अलग शहरों से मोतियाबिंद का ऑपरेशन के लिए पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भी परेशानी हुई।

सैकड़ों की संख्या में मरीज और उनके परिजनों ने सीमा पर ही सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे अपना डेरा जमा लिया और बॉर्डर खुलने का इंतजार करते सुबह से नजर आए। इन लोगों ने आपातकालीन सेवा के तहत सीमा सुरक्षा के लिए भारतीय सीमा क्षेत्र में तैनात एसएसबी अधिकारियों और जवानों से भी गुहार लगाई। कई लोग नो मैन्स लैंड क्षेत्र में गए और नेपाल क्षेत्र में सुरक्षा के लिए तैनात नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष मतदान को लेकर दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों के अधिकारियों की हाल में हुई बैठक के आलोक में एसएसबी एवं एपीएफ के अधिकारियों ने साफ मना कर दिया और कहा कि सीमा खुलने के बाद ही नेपाल में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

मौके पर मौजूद विनीता राय, सुमन घोष, महेंद्र कुमार, शुभेंदु भट्टाचार्य, नीलिमा देवी आदि ने बताया कि वे लोग पश्चिम बंगाल के अलग-अलग स्थानों से नेपाल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन के लिए बॉर्डर तक पहुंचे थे। इन्हें नहीं पता था कि चुनाव के कारण भारत-नेपाल सीमा को सील कर दिया गया है। फलस्वरूप यहां पहुंचने के बाद उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

उल्लेखनीय हो कि नेपाल के विराटनगर सहित लहान में स्थित नेत्रालय में आंखों का इलाज और ऑपरेशन काफी कम शुल्क और सब्सिडी में होता है, जिसके कारण से बड़ी संख्या में भारतीय लोग नेपाल में ज़ाकर आंखों का इलाज के साथ ऑपरेशन कराते हैं। न केवल बिहार, बल्कि दूसरे अन्य प्रदेशों से भी बहुतायत संख्या में नेत्र बीमारी से संबंधित मरीज इलाज के लिए नेपाल पहुंचते हैं।


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