नई दिल्ली, 11 नवंबर । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 18 नवम्बर को दिल्ली के विज्ञान भवन में पहला जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) पुरस्कार प्रदान करेंगी। इसी कार्यक्रम में छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार भी दिए जाएंगे। ये सम्मान जल शक्ति अभियान ‘कैच द रेन’ के तहत पानी बचाने और जल संरक्षण में बेहतर काम करने वाले राज्यों, जिलों, संस्थानों और लोगों को दिए जाएंगे।
केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय ने मंगलवार को इस साल के पुरस्कारों का ऐलान किया। कुल 100 पुरस्कार दिए जाएंगे, जिनमें तीन राज्य, 67 जिले, छह नगर निगम, एक शहरी निकाय, दो मंत्रालय या विभाग, दो उद्योग, तीन एनजीओ, दो समाजसेवी और 14 नोडल अधिकारी शामिल हैं।
मंत्रालय के मुताबिक, जहां 10 लाख संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया था, वहीं 27.6 लाख संरचनाओं का निर्माण और मरम्मत का काम पूरा हो चुका है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को अलग-अलग कैटेगरी में पुरस्कार मिलेंगे। पहली कैटेगरी में दो करोड़ रुपये, दूसरी में एक करोड़ रुपये और तीसरी कैटेगरी में 25 लाख रुपये दिए जाएंगे। विजेताओं को जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरुद्धार विभाग के सचिव की ओर से हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा। प्रधानमंत्री के ‘जनशक्ति से जलशक्ति’ के विजन से प्रेरित जल संचय जन भागीदारी पहल की शुरुआत 6 सितंबर 2024 को गुजरात के सूरत से हुई थी। यह योजना लोगों की भागीदारी पर आधारित है और देशभर में जल संरक्षण और कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। इस कार्यक्रम के तहत राज्यों को पांच जोन में बांटा गया है। हर जिले को कम से कम 10 हजार कृत्रिम रिचार्ज और भंडारण संरचनाएं बनाने के लिए प्रेरित किया गया है।
उत्तर-पूर्वी और पर्वतीय राज्यों के लिए यह लक्ष्य तीन हजार संरचनाओं का है, जबकि देशभर के नगर निगमों को 10 हजार संरचनाएं तैयार करने का निर्देश दिया गया है। शहरी इलाकों में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने जल शक्ति मंत्रालय के साथ मिलकर काम किया है। इसके तहत शहरी स्थानीय निकायों को कम से कम दो हजार रिचार्ज संरचनाएं तैयार करने के लिए प्रेरित किया गया है।
