आज 12 नवंबर को लोक सेवा प्रसारण दिवस मनाया जा रहा है। यह दिवस हर वर्ष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के उस ऐतिहासिक अवसर की स्मृति में मनाया जाता है, जब उन्होंने 1947 में आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) से अपना पहला और एकमात्र रेडियो संबोधन दिया था।
इस दिन महात्मा गांधी ने नई दिल्ली स्थित ब्रॉडकास्टिंग हाउस का दौरा किया था और दीपावली के अवसर पर कुरुक्षेत्र में रह रहे पाकिस्तान से विस्थापित भारतीयों को रेडियो के माध्यम से संबोधित किया था। इस अवसर पर उनके साथ स्वतंत्रता सेनानी राजकुमारी अमृत कौर भी उपस्थित थीं।
शुरुआत में गांधीजी रेडियो पर बोलने को लेकर संकोच में थे, क्योंकि उन्होंने पहले केवल गोलमेज सम्मेलन के दौरान ही रेडियो के माध्यम से संवाद किया था। बाद में घनश्याम दास बिड़ला के आग्रह पर उन्होंने यह ऐतिहासिक संबोधन देने का निर्णय लिया। इस अवसर पर स्टूडियो को गांधीजी की दैनिक प्रार्थना सभा की शैली में तैयार किया गया था।
अगले दिन हिंदुस्तान टाइम्स में शीर्षक छपा — “महात्मा गांधी ने रेडियो को चमत्कारी शक्ति का उदाहरण बताया।” इसके बाद बिड़ला हाउस में गांधीजी की दैनिक प्रार्थना सभाओं की रिकॉर्डिंग शुरू हुई, जो आज भी प्रसार भारती अभिलेखागार में सुरक्षित हैं।
वर्ष 2000 में तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री सुषमा स्वराज ने घोषणा की कि हर वर्ष 12 नवंबर को ‘लोक सेवा प्रसारण दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। तब से आकाशवाणी इस अवसर पर विशेष कार्यक्रमों, संगोष्ठियों और गांधीजी को समर्पित भजनों के माध्यम से इसे मनाता आ रहा है।
मार्च 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 100वें एपिसोड के अवसर पर, उसी ऐतिहासिक स्टूडियो को ‘बापू स्टूडियो’ के रूप में समर्पित किया गया, जहाँ से गांधीजी ने अपना संदेश दिया था। यहाँ उस ऐतिहासिक क्षण की रिकॉर्डिंग, प्रार्थना सभा के अंश, स्मृति वस्तुएँ और एक विशेष फोटो गैलरी प्रदर्शित की गई हैं।
आकाशवाणी पूरे वर्ष गांधीवादी विचारधारा पर आधारित कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रसारित करता है। लोक सेवा प्रसारण दिवस, प्रसारकों को यह प्रेरणा देता है कि वे गांधीजी के आदर्शों और शिक्षाओं को देश के हर कोने तक पहुँचाएँ।
