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सेवा कोई काम नहीं… एक व्रत है और यह जीवनभर चलेगा: श्रीकृष्ण पाण्डेय

Date : 22-Nov-2025

गोरखपुर, 22 नवंबर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के प्रतिष्ठित प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार के लिए चयनित गोरखपुर के श्रीकृष्ण पाण्डेय 'आजाद' का जीवन संघर्षपूर्ण होते हुए भी प्रेरणादायक है। आजाद का कहना है कि कभी-कभी जीवन टूटकर ही नया आकार पाता है। अवसाद बीमारी नही है, बल्कि एक परिस्थिति है जिससे निकला जा सकता है। बस शर्त यह है कि उसे कोई सुनने और समझने वाला हो।

देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में होने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 71वें राष्ट्रीय अधिवेशन में गोरखपुर के श्रीकृष्ण पाण्डेय 'आजाद' को प्रतिष्ठित प्राध्यापक यशवंत राव केलकर युवा पुरस्कार दिया जाएगा। इस पुरस्कार के लिए उनके नाम की घोषणा होने के बाद हिन्दुस्थान समाचार ने आजाद से बात की। जीवन-यात्रा और संघर्ष के सवाल पर पाण्डेय ने कहा कि कभी-कभी जीवन टूटकर ही नया आकार पाता है। मेरे साथ भी एक दुर्घटना ने ऐसा ही किया। सड़क हादसे ने मेरे शरीर के साथ-साथ मन को भी भीतर तक तोड़ दिया। महीनों तक अवसाद में रहा। निराशा, भय, अकेलापन…। सब कुछ जैसे मेरी पहचान बन गया था। लगता था कि अब जीवन का कोई उद्देश्य नहीं बचा। लेकिन ऐसे समय में मां की एक बात मेरी सबसे बड़ी शक्ति बनी रही। “…बेटा, दर्द ईश्वर की भाषा है, इससे भागना नहीं… इसे समझना।” शायद मां के इसी वाक्य ने मुझे फिर से जीना सिखाया।

मानसिक रोगियों की सेवा का विचार आपको कैसे आया। इस सवाल के जवाब में आज़ाद ने कहा कि मेरे अपने अवसाद ने मुझे सिखाया कि मानसिक बीमारी कोई कमी नहीं बल्कि एक स्थिति है और हर स्थिति से राहत मिल सकती है, यदि कोई धैर्य से सुने, समझे और उसे थाम ले। श्रीकृष्ण पाण्डेय ने कहा कि सड़कों पर भटकते मानसिक रोगियों को समाज ‘पागल’ कहकर किनारे कर देता है, जबकि अंदर वे सिर्फ टूटे हुए इंसान होते हैं। मैंने तय किया कि मैं उन लोगों के लिए खड़ा रहूंगा, जिन्हें दुनिया ने छोड़ दिया है। ऐसे लाेगाें काे भोजन, उनका इलाज, उन्हें नहलाना और कपड़े देने के साथ उन्हें परामर्श देना, यही मेरा रोज़ का काम है। इस काम में भी मुझे मां की शिक्षा याद आती है— “…दूसरों का दर्द पढ़ना सीख लो, आधी दुनिया खुद ही ठीक हो जाएगी।”

जेलों में कैदियों की काउंसलिंग करने के अनुभव के सवाल पर श्रीकृष्ण पाण्डेय ने बताया कि जेल की दीवारों के पीछे सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि टूटे हुए बचपन, गरीबी, गलत संगत और क्षणिक आवेग की कहानियां होती हैं। मैंने पाया कि कई कैदी अपराधी कम, परिस्थितियों के शिकार ज़्यादा होते हैं। सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि उनके भीतर अपराध से ज्यादा अपराधबोध होता है। उन्हें सिर्फ सज़ा की नहीं बल्कि सुनवाई की जरूरत होती है। पाण्डेय ने बताया कि कैदियाें से बात करने के दाैरान अक्सर कैदी बाेलते हैं कि “साहब, पहली बार किसी ने इंसान समझकर हमसे बात की।” ऐसे शब्द सुनकर मुझे लगता है कि शायद मेरा यही होना सार्थक है।

अभाविप के ‘यशवन्त राव केलकर युवा पुरस्कार’ के लिए नाम चयनित हाेने पर आज़ाद ने कहा कि यह पुरस्कार केवल मेरी कोशिशों का सम्मान नहीं, बल्कि मेरी मां की सोच, मेरे दर्द की सीख और उन अनगिनत लोगों की दुआओं का सम्मान है जिनके जीवन को छूने का अवसर मुझे मिला। सेवा कोई काम नहीं… मेरे लिए एक व्रत है और यह व्रत जीवनभर चलेगा। इस सेवा-यात्रा के लिए प्रेरणा के साेत के सवाल पर आज़ाद ने कहा कि मेरी हर सांस के पीछे एक ही आधार है—मां के सपने। अगर दुर्घटना न होती, अगर अवसाद न आता, तो शायद मैं यह रास्ता नहीं चुन पाता। दर्द ने दिशा दी, और मां के सपनों ने उस दिशा को अर्थ दिया। मेरे लिए सेवा कोई सामाजिक गतिविधि नहीं, बल्कि यह मेरा व्यक्तिगत संकल्प है कि मां के सपनों को हर हाल में साकार करूँ।

उन्हाेंने कहा कि जीवन छोटा है, पर किसी के लिए उम्मीद बन जाना… यही सबसे बड़ी जीत है। मैं बस यही प्रयास कर रहा हूं कोई बेसहारा भूखा न सोए, कोई मानसिक रोगी सड़कों पर अपमानित हाेकर न भटके और कोई कैदी खुद को हमेशा के लिए खोया हुआ न समझे। यही मेरा धर्म है, मेरी दिशा है, मेरा संकल्प है।

उल्लेखनीय है कि श्रीकृष्ण पांडेय 'आजाद' इस्माइल रोटी बैंक फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं और गोरखपुर में एक राेटी बैंक चलते हैं। इसके अलावा व गोरखपुर आसपास के क्षेत्र में निराश्रित मानसिक रोगियाें की सेवा करते हैं। आजाद गोरखपुर क्षेत्र के मनोरोगियों काे चिकित्सा सुविधा, दवा और उनके पुनर्वास में भी सहायता कर रहे हैं। उन्होंने जेल के बंदियाें के पुनर्वास, बाल भिक्षावृत्ति उन्मूलन, नशा मुक्ति और स्वच्छता व पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। पाण्डेय दो पुनर्वास केंद्रों के संचालन करने के साथ अपने जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से अनेक बच्चों एवं युवाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला चुके हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार और विभिन्न संस्थाओं की ओर से उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं।


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