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गुरुग्राम: देश के औद्योगिक व श्रमिक भविष्य के लिए बेहतर कदम है लेबर कोड्स: विनोद बापना

Date : 22-Nov-2025

 गुरुग्राम, 22 नवंबर। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार व्यापक श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को सीआईआई गुरुग्राम जोन के चेयरमैन विनोद बापना ने भारत की औद्योगिक संरचना के लिए एक युगांतरकारी फैसला करार दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि ये सुधार भारत के उत्पादन, श्रमिक कल्याण और निवेश माहौल तीनों के लिए ऐतिहासिक बदलाव लाएंगे।


विनोद बापना ने शनिवार काे जारी बयान में कहा कि 29 पुराने और जटिल श्रम कानूनों को हटाकर चार सरल और व्यापक कोड्स में समाहित करना ना सिर्फ उद्योगों के लिए राहत भरा कदम है, बल्कि देश के श्रमिकों को भी आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करेगा। बापना ने कहा कि नए कोड्स ने ईज ऑफ डूइंग बिजऩेस को नई दिशा दी है। उन्होंने बताया कि इनसे 29 कानूनों का एकीकरण उद्योगों पर से भारी प्रशासनिक बोझ हटेगा, डिजिटल कंप्लायंस से कागज़ी कार्य में कमी आएगी और पारदर्शिता बढ़ेगी तथा सिंगल लाइसेंसिंग सिस्टम से कंपनियों का समय और संसाधन दोनों बचेंगे। उन्होंने कहा ये नियम जितने सरल और स्पष्ट होंगे, निवेश उतनी ही तेजी से बढ़ेगा।

विनोद बापना ने सरकार द्वारा गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने को क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे देश के नए डिजिटल और असंगठित कार्यबल को भविष्य में बीमा, पेंशन और स्वास्थ्य लाभ जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी।

इसके अलावा वेतन की एकीकृत परिभाषा और समय पर भुगतान की गारंटी से श्रमिक विवादों में कमी आएगी। बापना ने कहा कि सभी सेक्टर्स में एक समान सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होने से दुर्घटनाएं कम होंगी और कार्यबल की उत्पादकता प्राकृतिक रूप से बढ़ेगी। इसे उन्होंने उद्योग और श्रमिक दोनों के लिए जीत की स्थिति बताया। सुरक्षित परिस्थितियों में महिलाओं को किसी भी शिफ्ट में काम करने की अनुमति देने की नीति को उन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया। इससे ना सिर्फ महिला भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि उद्योगों में विविधता का स्तर भी ऊंचा होगा। सरल नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के कारण घरेलू और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं हैं।

बापना के अनुसार इससे उद्योगों का विस्तार तेज होगा और देश में नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति देगा।


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