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आईआईटी खड़गपुर ने रचा इतिहास, स्मारक डाक टिकट का लोकार्पण

Date : 24-Nov-2025

बीरभूम, 24 नवम्बर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर ने प्लैटिनम जुबिली समारोह के अवसर पर अपने गौरवशाली इतिहास का एक और स्वर्ण अध्याय जोड़ते हुए इंडिया पोस्ट द्वारा जारी विशेष स्मारक डाक टिकट का लोकार्पण किया। यह भव्य कार्यक्रम श्रीनिकेतन के सांस्कृतिक महत्व से समृद्ध रंगबितान पर्यटन परिसर में आयोजित हुआ, जहां आईआईटी खड़गपुर की 75 वर्षों की शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और राष्ट्रीय योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे, जिनमें ऑनलाइन केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार, अमेरिकी महावाणिज्यदूत कैथी गाइल्स-डियाज, आईआईटी खड़गपुर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष टीवी नरेंद्रन, संस्थान के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती, पश्चिम बंगाल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल अशोक कुमार, आईआईटी खड़गपुर फाउंडेशन अमेरिका (यूएसए) के अध्यक्ष डॉ. अशोक देयसारकर के साथ ही इंडिया पोस्ट और आईआईटी खड़गपुर के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

आईआईटी खड़गपुर की नींव ऐतिहासिक हिजली डिटेंशन कैंप में रखी गई थी और तब से यह “आईआईटी ऑफ फर्स्टस” के रूप में वैश्विक ख्याति प्राप्त संस्थान बन चुका है। जारी किया गया यह स्मारक डाक टिकट संस्थान की उसी परिवर्तनकारी यात्रा, नवाचार की परंपरा और राष्ट्र निर्माण के योगदान का प्रतीक है।

इंडिया पोस्ट की परंपरा के अनुरूप यह डाक टिकट पूरे देश के 1,64,987 डाकघरों में एक साथ जारी किया गया, जिससे आईआईटी खड़गपुर के देशव्यापी सम्मान और इसके नागरिकों से गहरे संबंध का संदेश मिलता है।

डाक टिकट केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की स्मृतियों के वाहक होते हैं—और यह विशेष टिकट आईआईटी खड़गपुर की विरासत को स्थायी तौर पर अमर करता है।

कार्यक्रम के दौरान आईआईटी खड़गपुर ने ह्यूस्टन, अमेरिका (यूएसए) में प्रस्तावित रणनीतिक आउटरीच पहल पर विचार-विमर्श भी शुरू किया। आईआईटी खड़गपुर फाउंडेशन अमेरिका और डॉ. अशोक देयसारकर के सहयोग से की जा रही। वैश्विक अकादमिक एवं अनुसंधान सहयोग का विस्तार, नवाचार एवं स्टार्टअप ईकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के मार्ग, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक आदान-प्रदान के ढांचे, उद्योग–पूर्व छात्र सहभागिता को नए आयाम, अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक रोडमैप तैयार करना आदि चर्चाऐं निम्न बिंदुओं पर केंद्रित रहेंगी।

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा परिकल्पित श्रीनिकेतन भारतीय सांस्कृतिक-बौद्धिक धरोहर का प्रतीक है। यहां कार्यक्रम आयोजित करने के पीछे यह संदेश निहित है कि आईआईटी खड़गपुर भारतीय ज्ञान-परंपरा और आधुनिक नवाचार के समन्वय का केंद्र है, संस्थान का शैक्षणिक दर्शन टैगोर के समग्र शिक्षा सिद्धांतों से गहराई से जुड़ा है, विज्ञान, शिक्षा और शोध में बंगाल के ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने का उद्देश्य।

प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि स्मारक डाक टिकट का लोकार्पण, आईआईटी खड़गपुर समुदाय के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। यह हमारी यात्रा, हमारी उपलब्धियों और हमारे भविष्य को लेकर भारत के विश्वास का प्रतीक है। ह्यूस्टन पहल पर हुई चर्चाएँ वैश्विक सहभागिता के नए अध्याय की शुरुआत हैं।

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि आईआईटी खड़गपुर की प्लैटिनम जुबिली 75 वर्षों के राष्ट्र निर्माण का प्रतीक है। यह स्मारक डाक टिकट इस गौरवपूर्ण विरासत का सम्मान करता है। ह्यूस्टन में प्रस्तावित आउटरीच जैसे प्रयास संस्थान की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को और मजबूत करेंगे।

अमेरिकी महावाणिज्यदूत कैथी गाइल्स-डियाज ने कहा कि आईआईटी खड़गपुर द्वारा ह्यूस्टन में आउटरीच सेंटर की योजना, अमेरिका और भारत की साझेदारी को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में और अधिक सुदृढ़ करेगी—विशेषकर ऐसे समय में जब वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है।

1951 में देश के प्रथम आईआईटी के रूप में स्थापित आईआईटी खड़गपुर सात दशकों से अधिक समय से शैक्षणिक नेतृत्व, अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार का प्रमुख स्तंभ रहा है। व्यापक परिसर, बहुविषयक संरचना और वैश्विक दृष्टि के साथ यह संस्था न निरंतर नए नेतृत्वकर्ताओं और दूरदर्शी प्रतिभाओं का निर्माण करता रहा है।


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