गढ़चिरौली/गोंदिया, 29 नवंबर:
स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य विकास नागपुरे विकास नागपुरे समेत 12 हार्डकोर माओवादी ने गोंदिया ने पुलिस के सामने हथियार दाल दिए है | इस सरेंडर को एमएमसी (MMC)जोन में पुलिस की बड़ी रणनीतिक जीत माना रहा है |
महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान में एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। शनिवार सुबह गोंदिया पुलिस के सामने स्पेशल जोनल कमेटी (SZC) के सदस्य अनंत उर्फ विकास नागपुरे समेत 12 खूंखार नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सरेंडर करने वाले इन माओवादियों पर कुल मिलाकर 89 लाख रुपये का इनाम घोषित था। यह हाल के महीनों में नक्सल आंदोलन को लगा सबसे तगड़ा झटका है।
हिड़मा की मौत के बाद नेतृत्व का संकट
एजेंसियों का मानना है कि शीर्ष नक्सली कमांडर हिड़मा की मौत के बाद संगठन के भीतर भारी उथल-पुथल मची हुई है। हिड़मा के जाने से संगठन में नेतृत्व का संकट (Leadership Vacuum) पैदा हो गया है, जिसके चलते कैडर का मनोबल टूट रहा है। यह सामूहिक सरेंडर उसी का नतीजा माना जा रहा है।
कैसे हुआ यह बड़ा सरेंडर?
गढ़चिरौली रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) अंकित गोयल ने इस ऑपरेशन की अंदरूनी कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि यह सरेंडर पुलिस के समन्वित प्रयासों और नक्सलियों के बीच चलाए जा रहे 'आउटरीच कार्यक्रमों' की सफलता है।
DIG गोयल ने कहा,
"करीब 7-8 दिन पहले, माओवादी एमएमसी (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़) जोन के प्रवक्ता ने सरेंडर की इच्छा जताई थी। उसने इन तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को दो चिट्ठियां भी लिखी थीं। उनकी इस इच्छा को देखते हुए हमने उनसे संपर्क किया। इसके बाद विकास नागपुरे ने अपने 10 अन्य साथियों के साथ सरेंडर कर दिया। इनके पास से 7 हथियार भी बरामद हुए हैं।"
इन बड़े चेहरों ने डाले हथियार
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में कई बड़े कमांडर शामिल हैं, जो हिंसा की कई बड़ी वारदातों, भर्ती अभियानों और वसूली नेटवर्क को संभालते थे। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
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विकास नागपुरे (अनंत): स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य
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नागासु गोलू वड्डे: डीवीसीएम (DVCM) कमांडर
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अन्य सदस्य: रानो पोरटी, संटू पोरटी, संगीता पंधारे, प्रताप बंटुला, अनुजा कारा, पूजा मुदीयम, दिनेश सोत्ती, शीला मडावी और अर्जुन डोडी।
हथियारों का जखीरा बरामद, पुनर्वास की तैयारी
सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने भारी मात्रा में हथियार और नक्सल सामग्री भी पुलिस को सौंपी है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मुख्यधारा में लौटने वाले इन सभी सदस्यों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ दिया जाएगा।
सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि इनसे पूछताछ के बाद नक्सल नेटवर्क से जुड़े कई और अहम खुलासे होंगे, जिससे भविष्य में और भी बरामदगी हो सकती है।
