01 दिसम्बर, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने रविवार को एनआईटी कुरुक्षेत्र के 20वें दीक्षांत समारोह में स्नातकों को संबोधित करते हुए अनुसंधान, नवाचार और भारत की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधानों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की।
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत औपनिवेशिक शिक्षा मॉडल की मानसिकता से आगे बढ़कर वैश्विक प्रौद्योगिकी नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने भारतीय सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपराओं पर आधारित बहु-विषयक शिक्षा को बढ़ावा देकर महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवीकरणीय ऊर्जा, अर्धचालक, जैव प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, सतत विनिर्माण, स्मार्ट मोबिलिटी और कृषि नवोन्मेष जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध बड़े अवसरों की ओर ध्यान दिलाया। राधाकृष्णन ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए और उसे राष्ट्रीय विकास में योगदान देना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों ने भारत को तकनीक के उपभोक्ता से निर्माता बनने की दिशा में आगे बढ़ाया है। उन्होंने छात्रों को अपने विचारों को उद्यमों में बदलने, रोजगार सृजन का हिस्सा बनने और भारत को “प्रतिभा पलायन से प्रतिभा प्राप्ति” की ओर ले जाने का आह्वान किया।
राधाकृष्णन ने एनआईटी कुरुक्षेत्र के शोध कार्यों की प्रशंसा करते हुए बताया कि संस्थान ने 64 पेटेंट हासिल किए हैं और डीआरडीओ व इसरो के साथ एआई-आधारित युद्ध प्रणालियों तथा चंद्रयान और मंगल ऑर्बिटर मिशनों जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया है। उन्होंने ग्रामीण विकास के लिए कम लागत वाली तकनीकों पर संस्थान के काम की भी सराहना की।
उन्होंने कहा कि अनुसंधान का उद्देश्य शहरी-ग्रामीण अंतर को कम करना, एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाना, कृषि को आधुनिक बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त करना होना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने युवाओं से विश्व-स्तरीय कंपनियाँ खड़ी करने का लक्ष्य रखने और यह विश्वास रखने को कहा कि अगला “गूगल, टेस्ला या स्पेसएक्स” भारत से उभर सकता है।
अपने संबोधन में उन्होंने छात्रों को नशे से दूर रहकर अनुशासित जीवन जीने की सलाह दी। राधाकृष्णन ने कहा कि दीक्षांत समारोह नई ज़िम्मेदारियों की शुरुआत का प्रतीक है और स्नातकों से समाज में प्रतिबद्धता और निष्ठा के साथ योगदान करने का आग्रह किया।
समारोह में हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, एनआईटी निदेशक बी.वी. रमना रेड्डी और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्ष डॉ. तेजस्विनी अनंत कुमार भी उपस्थित थे।
