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डाक विभाग के लिए साल 2025 रहा ऐतिहासिक, 452 पासपोर्ट केंद्रों से 29 लाख आवेदन

Date : 23-Dec-2025

नई दिल्ली, 23 दिसंबर । भारतीय डाक विभाग के लिए साल 2025 ऐतिहासिक रहा। इस साल डाक विभाग पासपोर्ट सेवा, आधार अपडेट, निर्यात हब, वित्तीय सेवाएं और डिजिटल नवाचार का केंद्र बनकर उभरा है। विभाग ने इस साल पूरे देश में 452 पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र संचालित कर जनवरी से नवंबर तक 29 लाख से अधिक पासपोर्ट आवेदन निपटाए, जिनमें 1.54 लाख पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट शामिल हैं। इससे विभाग ने 114 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई भी की।

विभाग ने देशभर में संचालित 13,352 आधार केंद्रों से 2.35 करोड़ से अधिक नामांकन और अपडेट कर 129 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। विभाग ने 1 अगस्त से 15 अगस्त तक चलाए गए देशव्यापी 'हर घर तिरंगा' अभियान में 28 लाख से ज्यादा राष्ट्रीय झंडे बांटकर इतिहास बनाया। इसके अलावा विभाग ने 1,013 डाकघर निर्यात केंद्रों के जरिए छोटे कारीगरों, महिला उद्यमियों और एमएसएमई को सीधे विदेश निर्यात का मौका देकर 12.31 लाख शिपमेंट और करीब 287 करोड़ रुपये के निर्यात को सुगम बनाया। विभाग ने इसरो और आईआईटी हैदराबाद के साथ विकसित नवाचार आधारित 10-अक्षर वाले जियोकोडेड डिजिटल एड्रेस सिस्टम (डिजिपिन) को एशियन पैसिफिक पोस्टल यूनियन फोरम में इनोवेशन के लिए स्पेशल मेंशन अवॉर्ड भी हासिल किया।

केंद्रीय संचार मंत्रालय के अनुसार, विभाग ने विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर पूरे देश में आंध्र प्रदेश के अराकू, तमिलनाडु के तिरुपुर और पोलाची, बिहार के बखरा और राजनगर, केरल के कलपेट्टा, मध्य प्रदेश के खरगोन, भिंड और मंडला तथा उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में 10 पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र खोलकर इन केंद्रों की संख्या 452 तक पहुंचा दी। अब डाक विभाग की योजना हर लोकसभा क्षेत्र में एक केंद्र खोलने की है ताकि लोगों को पासपोर्ट बनवाने में होने वाली दिक्कतों को कम किया जा सके। इस साल जनवरी से नवंबर तक यहां से 29 लाख से ज्यादा पासपोर्ट आवेदन रिव्यू किए गए, जिनमें 1.54 लाख पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट शामिल हैं। इन आवेदनों से विभाग ने 114 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की।

डाक विभाग ने बताया कि आधार सेवाओं की बात करें तो डाक विभाग ने पूरे देश में 13,352 आधार केंद्र चल रहे हैं जहां लोग घर के पास नया आधार बनवा सकते हैं या पुराना अपडेट करवा सकते हैं। जनवरी से नवंबर तक 2.35 करोड़ से ज्यादा नामांकन और अपडेट हुए, जिससे विभाग ने 129 करोड़ रुपये का राजस्व हांसिल किया। साथ ही विभाग ने दूरदराज के गांवों तक पहुंच बनाने के लिए मोबाइल और लैपटॉप आधार किट बांटे गए, जिससे कैंप लगाकर सेवा दी जा सकती है। अक्टूबर में नेशनल पोस्टल वीक के दौरान स्कूलों में 1,552 कैंप आयोजित किए गए। 5 साल और 15 साल की उम्र पूरी करने वाले बच्चों का जरूरी बायोमेट्रिक अपडेट हुआ, जिसमें 4,335 नए नामांकन और 35,606 अपडेट शामिल हैं। सबसे खास बात यह रही कि सियाचिन में आधार केंद्र खुल गया, जो देश का सबसे ऊंचा आधार केंद्र बन गया। सेना के इलाकों में 110 केंद्र काम कर रहे हैं। इससे लोगों को अब आधार में नाम, पता, मोबाइल नंबर बदलवाना या फिंगरप्रिंट और आंख की रेटीना का अपडेट करवाना बेहद आसान हो गया है।

विभाग ने 01 से 15 अगस्त तक चलाए गए देशव्यापी 'हर घर तिरंगा' अभियान में जबरदस्त भूमिका निभाते हुए स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 28 लाख 13 हजार से ज्यादा तिरंगा झंडे बांटे। झंडों को हर डाकघर में झंडे बिक्री के लिए रखा गया और ई पोस्ट ऑफिस पोर्टल पर भी ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया। इस दौरान डाक कर्मियों ने गांव गांव रैलियां निकालीं, प्रभात फेरी की, घर घर जाकर झंडे बांटे, बाइक रैली की और स्कूलों में बच्चों से राखी और पत्र बनवाए।

छोटे कारोबारियों और कारीगरों के लिए डाकघर निर्यात केंद्र योजना के तहत पूरे देश में 1,013 केंद्र हैं जो 762 जिलों में फैले हुए हैं। साथ ही देश के पूर्वोत्तर के हिस्से में भी 122 केंद्र खोले गए है। इससे कारीगर, बुनकर, महिला उद्यमी, सेल्फ हेल्प ग्रुप और छोटे एमएसएमई बिना किसी बिचौलिए के सीधे विदेश निर्यात कर रहे हैं। इन केंद्रों से साल भर में 12.31 लाख शिपमेंट हुए जिनकी कुल कीमत करीब 287 करोड़ रुपये रही।

डाक विभाग का इस साल लांच डिजिपिन सबसे बड़ा गेम चेंजर साबित हुआ है। इसरो और आईआईटी हैदराबाद के साथ मिलकर बनाया गया 10 अक्षर का कोड देश के हर 4 बाई 4 मीटर हिस्से को अलग पहचान देता है। यह इस साल के मार्च में लॉन्च हुआ और मई में वेब ऐप आया। अब पता ढूंढना बहुत आसान हो जाएगा। ई कॉमर्स, सरकारी योजनाएं और इमरजेंसी सर्विस सब इसका फायदा उठा रही हैं। डाक विभाग की इस पहल को बैंकॉक में एशियन पैसिफिक पोस्टल यूनियन फोरम ने इनोवेशन के लिए स्पेशल मेंशन अवॉर्ड भी दिया।

वित्तीय सेवाओं में डाक विभाग ने अपने योगदान को बढ़ाकर म्यूचुअल फंड निवेशकों का केवाईसी करने के लिए अपने डाकिया घर जाकर करना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए डाक विभाग ने यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया, एसयूयूटीआई, निप्पॉन इंडिया, एसबीआई फंड्स और जुलाई में एएमएफआई के साथ समझौते किए। एएमएफआई करार से सभी 50 म्यूचुअल फंड कंपनियों के निवेशक कवर हो गए। नवंबर तक 5 लाख केवाईसी पूरे हो चुके। अब डाकघर म्यूचुअल फंड बेचने भी लगेंगे, जिससे ग्रामीण इलाकों में निवेश की जागरूकता बढ़ेगी।

इसके अलावा विभाग ने बीएसएनएल के साथ सितंबर में करार किया। अब डाकघरों में बीएसएनएल सिम बिकेगी और रिचार्ज होगा। असम में पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा है, अब विभाग इसे पूरे देश में लागू करेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर बात करें तो यूपीआई को यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन से जोड़कर डाक विभाग ने विदेशी रेमिटेंस को आसान बना दिया है। इसके लिए विभाग ने इस साल मार्च में जयपुर में एशिया पैसिफिक पोस्टल लीडर्स फोरम आयोजित की गई थी, जिसमें 28 देशों के प्रतिनिधि आए थे। साथ ही दिसंबर महीने में डाक विभाग ने रूस पोस्ट के साथ ट्रैक्ड पैकेट सर्विस का समझौता हुआ।

विभाग ने इस साल 42 ऐतिहासिक टिकट भी जारी किए। इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ साल, कोडाइकनाल ऑब्जर्वेटरी के 125 साल, सिक्किम राज्य के 50 साल, वंदे मातरम के 150 साल, चेनाब रेल ब्रिज और एमएस स्वामीनाथन जैसे महान व्यक्तित्व शामिल हैं। साथ ही विभाग ने 47 पर्सनलाइज्ड माई स्टैंप भी जारी किए।

इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र के 80 साल पूरे होने पर डाक विभाग की ओर से आयोजित की गई स्टैंप डिजाइन कॉम्पिटिशन में 7.4 लाख बच्चों ने हिस्सा लिया।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की 1.69 लाख यूनिट्स का सत्यापन किया गया। एटीएम नेटवर्क अपग्रेड कर 1000 से ज्यादा नई मशीनें भी लगाई गईं। डाक विभाग ने जनवरी से ई-केवाईसी अभियान शुरू कर 1 लाख से ज्यादा अकाउंट खोले और 24 लाख ट्रांजेक्शन भी किए।

इस साल दिसंबर में ट्राई के साथ ग्रामीण मोबाइल कनेक्टिविटी सर्वे करा रहा है। डाक सेवक ऐप से 6.5 लाख गांवों का सर्वे करेंगे। एमएसएमई उद्यम रजिस्ट्रेशन और अनौपचारिक माइक्रो इंटरप्राइज का सत्यापन भी डाक विभाग करेगा। इससे असली उद्यमियों को ही सब्सिडी और लोन मिलेगा।


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