मेदिनीपुर, 09 जनवरी । पूर्व मेदिनीपुर जिले के मयना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत तमलुक ब्लॉक में सरकारी श्मशान और सिंचाई विभाग की भूमि को अवैध रूप से बेचने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह आरोप भारतीय जनता पार्टी के विधायक अशोक दिन्दा ने स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेता के खिलाफ लगाए हैं। हालांकि तृणमूल नेता ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
बीजेपी विधायक अशोक दिन्दा का आरोप है कि श्रीरामपुर-एक ग्राम पंचायत के तेलिपोता बाजार इलाके में सरकारी श्मशान सहित सिंचाई विभाग की जमीन को अवैध रूप से बेच दिया गया है। इस मामले को लेकर उन्होंने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया है। घटना को लेकर पूरे क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।
बताया गया है कि श्रीरामपुर ग्राम पंचायत के तेलिपोता बाजार स्थित हांसुआखाली नहर के बांध से सटी सड़क किनारे की जमीन को तृणमूल नेता चित्तरंजन भौमिक ने लंबी बाड़ लगाकर घेर लिया है। आरोप है कि यह जमीन आम लोगों के आवागमन के लिए उपयोग में लाई जाती थी। इस संबंध में चित्तरंजन भौमिक के परिजन ज्योत्स्ना भौमिक ने ब्लॉक प्रशासन और पुलिस में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है।
शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि नहर के किनारे स्थित सार्वजनिक मार्ग की जमीन को कथित रूप से धन के बदले अवैध रूप से बेचा जा रहा है। इसके साथ ही नहर के पास स्थित सरकारी श्मशान भूमि को भी बेचने की कोशिश किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस पूरे मामले को लेकर गुरुवार शाम को फोन पर संपर्क करने पर भाजपा विधायक अशोक दिन्दा ने आरोपों की पुष्टि की।
मामले की जानकारी मिलने के बाद मयना के विधायक अशोक दिन्दा ने नहर किनारे स्थित इलाके का गुरुवार को निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के नेता भारी रकम लेकर सार्वजनिक उपयोग की जमीन की बिक्री कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि नहर किनारे लगे सरकारी पेड़ों को भी काट दिया गया है। इस पूरे मामले की जानकारी बीडीओ और भूमि सुधार विभाग को दी गई है।
वहीं, इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्राम पंचायत के विपक्षी नेता और तृणमूल कांग्रेस के क्षेत्रीय अध्यक्ष चित्तरंजन भौमिक ने गुरुवार देर शाम को कहा कि तेलिपोता बाजार के पास जिस जमीन को लेकर बीजेपी आरोप लगा रही है, वह पूरी तरह रैयती भूमि है। उन्होंने दावा किया कि उक्त जमीन पांच लोगों ने मिलकर खरीदी है और वहां किसी प्रकार का सार्वजनिक रास्ता नहीं है।
चित्तरंजन भौमिक ने यह भी स्पष्ट किया कि "श्मशान भूमि संबंधित खसरा नंबर 762 में स्थित है, जहां आने-जाने के लिए अलग से रास्ता मौजूद है। उन्होंने कहा कि अपनी रैयती जमीन की घेराबंदी की गई है और धन के बदले जमीन बेचने का आरोप पूरी तरह निराधार और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है।"
