कोयंबटूर, 30 जनवरी । दक्षिण कैलाश नाम में मशहूर वेल्लियंगिरी पर्वत पर स्थित अंडवर स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन के लिए
काेर्ट के आदेश के बाद श्रद्धालुओं काे सर्दी में भी जाने की अनुमति दे दी गई है। वन विभाग की कई प्रतिबंधाें के साथ 1 फरवरी से इसपर्वत पर श्रद्धालु जा सकेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जिला वन विभाग के अधिकारी व्यापक तैयारियां कर रहे हैं।
दरअसल, जिले के पश्चिमी घाट की तलहटी में पूंडी वेल्लियंगिरी अंडवर मंदिर स्थित है। इसके पास सातवें पर्वत पर वेल्लियंगिरी अंडवर स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। इसे दक्षिण कैलाश भी कहा जाता है। इस पर्वत पर जाने के लिए घने वन क्षेत्र और पर्वतीय मार्ग से पैदल यात्रा करनी होती है। स्थानीय प्रशासन की ओर से सर्दियों में इस पर चढ़ाई की अनुमति नहीं दी जाती है। आमतौर पर केवल मार्च, अप्रैल और मई महीनों में ही यहां जाने की अनुमति दी जाती रही है।पिछले वर्ष इस पर्वत पर यात्रा के दौरान
नौ श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। इसके बाद प्रशासन ने रोक लगा दी थी। बाद में मामला मद्रास हाई कोर्ट गया और कोर्ट ने
श्रद्धालुओं को फरवरी में यात्रा कराने के लिए प्रशासन को आदेश दिए थे। इसी के तहत 1 फरवरी से श्रद्धालुओं को पर्वत पर चढ़ने की अनुमति दी गई है।
इस पर्वत पर जानेे के लिए वन विभाग ने श्रद्धालुओं पर कड़े प्रतिबंधों के साथ एडवाइजरी जारी की है। इस संबंध में कोयंबटूर जिला वन अधिकारी ने बताया कि वेल्लियंगिरी पर्वत पर जाने वाले श्रद्धालुओं को अत्यंत सावधानी के साथ यात्रा करनी चाहिए। जिन लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, उन्हें पर्वत पर नहीं जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्वत की तलहटी में एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। चिकित्सीय जांच के बाद केवल शारीरिक रूप से सक्षम श्रद्धालुओं को ही चढ़ाई की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा तीसरे, छठे और सातवें पर्वत पर चिकित्सा शिविर भी लगाए जाएंगे। इनमें चिकित्सा कर्मचारियों के साथ वन विभाग के अधिकारी भी संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। तलहटी में वन विभाग और अग्निशमन विभाग के कर्मचारी तैयार रहेंगे। इसके अलावा आठ सदस्यों की एक निगरानी टीम पर्वत क्षेत्र में गश्त करेगी।
उन्होंने बताया कि पर्वत पर जाने वाले श्रद्धालु किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन न करें। इसी तरह प्लास्टिक सामग्री को किसी भी हालत में साथ न ले जाएं। तलहटी में इसकी निगरानी की जाएगी। बिस्कुट जैसी वस्तुएं लाने पर उनमें मौजूद प्लास्टिक कवर हटाकर सामग्री को कागज़ में लपेटकर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष पर्वतारोहण के दौरान नौ लोगों की मौत हुई थी। इसलिए इस बार ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
