मेदिनीपुर, 01 फ़रवरी । पश्चिम बंगाल के चर्चित ‘सलाइन कांड’ से जुड़े मामलों में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद अलाउद्दीन शनिवार को निलंबित अवस्था में ही सेवा निवृत्त हो गए। हालांकि, उनकी सेवानिवृत्ति के साथ ही पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर प्रशासनिक और कानूनी अनिश्चितता गहराती नजर आ रही है।
उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष जनवरी माह में मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज में सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान रिंगर्स लैक्टेट सलाइन दिए जाने के बाद पांच प्रसूति महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इस घटना में गढ़बेतिया निवासी एक महिला की मृत्यु हो गई थी। प्रारंभिक जांच में संक्रमण फैलने की आशंका जताई गई, जिसके बाद मामला राज्य स्तर पर सुर्खियों में आ गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाया था। अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक जयंत कुमार राउत, डॉ. मोहम्मद अलाउद्दीन समेत कुल 13 चिकित्सकों को निलंबित करने का आदेश दिया गया था। साथ ही संबंधित धाराओं में प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी।
शनिवार को डॉ. अलाउद्दीन ने मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य मौसमी नंदी को अपने सेवानिवृत्ति संबंधी दस्तावेज सौंप दिए। इसके बावजूद उनके पेंशन और अन्य रिटायरमेंट बेनिफिट्स पर फिलहाल संशय बना हुआ है। अस्पताल प्रशासन इस पूरे मामले पर सतर्क रुख अपनाए हुए है और सीधे तौर पर कोई टिप्पणी करने से बच रहा है।
अस्पताल के एक विशेष सूत्र ने बताया कि नियमों के अनुसार सभी दस्तावेज राज्य स्वास्थ्य भवन को भेजे जाएंगे और अंतिम निर्णय वहीं से लिया जाएगा। वहीं, जिले के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी सौम्यशंकर षड़ंगी ने भी स्पष्ट किया कि यह मामला पूरी तरह स्वास्थ्य भवन के अधीन है और इस पर फिलहाल कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
गौरतलब है कि इस मामले में निलंबित किए गए सात जूनियर डॉक्टरों का निलंबन कुछ समय बाद हटा लिया गया था, लेकिन डॉ. अलाउद्दीन सहित अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों का निलंबन अब तक बरकरार है। जांच प्रक्रिया के पूर्ण न होने और निलंबन की स्थिति समाप्त न होने के चलते उनके वित्तीय लाभों पर कानूनी अड़चनें आने की आशंका जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आगामी निर्णय पर अब सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
